अर्थव्यवस्था की खस्ताहाली के बीच केंद्र सरकार कराधान का नया ढांचा लेकर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कराधान के नए मंच को पारदर्शी और तर्कसंगत बता चुके हैं। करदाता से बिना संपर्क किए कर निर्धारण (फेसलेस टैक्स असेसमेंट) की नई प्रणाली और करदाता अनुरोध पत्र (चार्टर) की घोषणा ऐसे वक्त में सामने आई है, जब कोरोना काल के संकट में अर्थव्यवस्था खस्ताहाल हो गई है। सरकार उम्मीद जता रही है कि नई कर प्रणाली से उन लोगों को अपना समुचित कर भरने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जो आयकर विभाग में लालफीताशाही के कारण अपने कर का सही निर्धारण नहीं करा पाते थे। लेकिन खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या नए लोग कर मंच से जुड़ेंगे? क्या आयकर विभाग कर वसूली के अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर पाएगा।

क्या है नया कर ढांचा
देश में 25 सितंबर से करदाताओं के लिए बिना संपर्क किए कर निर्धारण (फेसलेस टैक्स असेसमेंट) और करदाता अनुरोध पत्र (चार्टर) की नई प्रणाली लागू की जाएगी। भारत से पहले अमेरिका, यूरोप और कई खाड़ी देशों में करदाता अनुरोध पत्र प्रणाली लागू है। इस ढांचे के तहत आयकर रिटर्न का मूल्यांकन (स्क्रूटनी) अब आयकर अधिकारी नहीं करेंगे, बल्कि यह काम तकनीक की मदद से किया जाएगा। इसका उद्देश्य करदाता और आयकर अधिकारी के बीच संपर्क को खत्म करना है। कर निर्धारण अधिकारी को पता नहीं होगा कि वह किसके रिटर्न का ब्योरा जांच रहा है। इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगने और करदाता की परेशानी कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर मूल्यांकन अधिकारी ने करदाता के रिटर्न में किसी तरह की खामी या गलती पकड़ी है तो वह उसे नोटिस भेज सकता है। नई प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वह अपील करेगा।

कैसे होगा मूल्यांकन
मूल्यांकन व्यवस्था में मुख्य तौर पर इन बातों पर जोर होगा- आयकर दफ्तर जाने की जरूरत नहीं, करदाता का चयन डाटा एनालिटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) यानी कंप्यूटर के जरिए होगा। एक शहर में आयकर के मूल्यांकन का आदेश, दूसरे शहर में समीक्षा और तीसरे शहर में उसे अंतिम रूप दिया जाएगा। आयकर के अधिकारियों को मामले कंप्यूटर के जरिए आबंटित किए जाएंगे। इससे अधिकारियों का क्षेत्राधिकार खत्म होगा। करदाता के साथ संपर्क की गुंजाइश नहीं होगी। अधिकारी नहीं, बल्कि अधिकारियों की टीम मामलों की समीक्षा करेगी।

छापों को लेकर क्या बदलेगा
अब तक कोई भी आयकर अधिकारी या अधिकृत निरीक्षक अपने क्षेत्र में सर्वे या छापे की कार्रवाई कर सकता था। अब उसे आयकर महानिदेशक (जांच) और आयकर मुख्य आयुक्त (टीडीएस) की मंजूरी लेनी होगी। आयकर कानून के सेक्शन 133ए के तहत सर्वे होता है। आयकर नोटिस की प्रक्रिया भी बदली गई है। साथ ही, उस पर तत्काल कार्रवाई करनी होगी। सभी मूल्यांकन आदेश अब ‘फेसलेस असेसमेंट स्कीम- 2019’ के जरिए ‘नेशनल ई-असेसमेंट सेंटर’ (राष्ट्रीय ई-आकलन केंद्र) से निकाले जाएंगे। यदि कोई करदाता सहयोग नहीं करता तो कर अधिकारी अपने विवेक के आधार पर कर मूल्यांकन करेगा। करदाता को ध्यान रखना होगा। यदि उसने ध्यान नहीं दिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकेगी।

करदाता अनुरोध पत्र क्या है
करदाता अनुरोध पत्र (टैक्सपेयर चार्टर) की व्यवस्था अमेरिका व कई पश्चिमी देशों के साथ ही यूरोप और खाड़ी देशों में भी लागू है। इसमें यह जिक्र होता है कि कर विभाग से करदाता को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी और करदाता से विभाग को क्या-क्या उम्मीदें हैं। चार्टर अपने आप में कोई कानून नहीं है। यह एक तरह से संकल्प जैसा है।

अनुरोध पत्र : वादे और उम्मीदें
सरकार ने करदाताओं से 14 वादे किए हैं और उनसे छह उम्मीदें जताई हैं। आयकर विभाग के वादें हैं : करदाता से निष्पक्ष और विनम्रता का व्यवहार, करदाता को ईमानदार माना जाएगा, करदाता की अपील के लिए निष्पक्ष मंच होगा, निर्णय में समय का पालन होगा, करदाता की निजता और गोपनीयता का सम्मान होगा, अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाएगा, करदाता अपना अधिकृत प्रतिनिधि चुन सकेंगे और खर्च कम किया जाएगा। विभाग की करदाता से उम्मीदें इस प्रकार होंगी : करदाता ईमानदारी से जानकारी देंगे, कानून के प्रति दायित्वों की जानकारी रखेंगे, अपना रिकॉर्ड सटीक रखेंगे।

क्या कहते हैं जानकार
नौकरी पेशा करदाताओं को इसका कुछ लाभ जरूर मिलेगा, लेकिन ज्यादा लाभ उन्हें मिलेगा जो व्यवसाय करने वाले हैं और आयकर विभाग के अधिकारियों के काम करने की शैली से दुखी होने की वजह से अपने कर का मूल्यांकन नहीं करा पाते।
– दीपक सूद, एसोचैम महासचिव

अब करदाताओं को खुद ही सारी जानकारी देनी पड़ेगी, जिस पर आयकर विभाग विश्वास करेगा। इसमें पहले लोगों को नोटिस मिला करते थे। ये अब नहीं जारी किए जाएंगे। सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और जानकारी को अपडेट कर दिया जाएगा।
– उदय कोटक, सीआइआइ अध्यक्ष

मूल्यांकन
केंद्रीय शुल्क और अंतरराष्ट्रीय कर समेत कई मामलों में मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने स्पष्ट किया है कि छापेमारी और जब्ती एवं अंतरराष्ट्रीय कर से संबंधित मामले ‘फेसलेस’ मूल्यांकन के दायरे में नहीं आएंगे। बड़े घोटालों, बड़े टैक्स चोरी के मामलों, काला धन, बेनामी संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय कर को अलग रखा गया है। सीबीडीटी व्यक्तिगत और कॉरपोरेट आयकर के मामलों को भी देखता है। उसने निर्देश जारी किया है कि राष्ट्रीय ई-आकलन केंद्र द्वारा सभी आकलन आदेश ‘फेसलेस आकलन योजना, 2019’ के तहत ही जारी किए जाएंगे। इससे कर अधिकारी मूल्यांकन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर पाएंगे, क्योंकि वे सिर्फ करदाता द्वारा लिखित में दिए गए ब्योरे पर निर्भर करेंगे और उनकी करदाताओं से व्यक्तिगत बैठक या बातचीत नहीं होगी।