शिक्षा ऋण के एक लाभार्थी के उत्पीड़न के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस मामले में सेंट्रल बैंक और तमिलनाडु के नीलगिरि जिले के कलेक्टर व पुलिस कप्तान को नोटिस जारी किए हैं। उनसे चार हफ्ते के भीतर तथ्यों सहित सफाई मांगी गई है। एक शिकायत का संज्ञान लेते हुए आयोग ने यह कदम उठाया है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कर्ज के लिए बैंक शाखा को दिए गए फोटो शाखा प्रबंधक ने लापता और बकायादार बता कर शाखा में टांग दिए।

सेंट्रल बैंक की नीलगिरि जिले की मंजूर शाखा ने इस परिवार के साथ और भी बेहूदगी की। परिवार कुल कर्ज का आधा पहले ही अदा कर चुका था तो भी बैंक ने कर्जदार के पिता को टेलीफोन कर धमकी दी। सदमे से बीमार पिता की मौत हो गई। परिवार के पास यह विकल्प था कि वह चाहे तो कर्ज 120 किस्तों में वापस कर दे। आयोग ने पाया कि बदनामी करने की प्रथा को लागू करके बैंक ने मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। छात्र को कर्ज न चुकाने वाले की श्रेणी में डालकर उनके फोटो उन्हें बदनाम करने के लिए उजागर करना गरीब परिवार के आदमी को अपनी इज्जत खाक में मिलना लगता है।

आयोग ने इस मामले में पीड़ित लड़की की शिकायत को गंभीरता से लिया। लड़की ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए बैंक से दो लाख रुपए शिक्षा ऋण लिया था। 2013 में उसकी पढ़ाई पूरी हुई। कर्ज वापसी की किस्त जुलाई 2014 से शुरू होनी थी। 120 किस्तों में वापसी का विकल्प होते हुए भी छात्रा ने आधा कर्ज जुलाई में ही वापस कर दिया था। फिर भी बैंकवालों ने उनकी तौहीन की।