केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्सपा) के तहत अरुणाचल प्रदेश में जिलो को अशांत क्षेत्र घोषित करने पर विभिन्न पक्षों के विचारों का यह कहते हुए खुलासा करने से इनकार कर दिया है कि सूचना गोपनीय है जिससे देश की संप्रभुता और अखंडता प्रभावित हो सकती है ।
मंत्रालय ने गैर सरकारी संगठन ‘कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव(सीएचआरआई) के वेंकटेश नायक द्वारा आरटीआई के तहत किए गए आवेदन के जवाब में कहा कि अरुणाचल प्रदेश में असम की सीमा से लगते तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग सहित सभी जिलों को अफ्सपा के तहत अशांत क्षेत्र घोषित किए जाने पर विभिन्न पक्षों के विचार गोपनीय हैं और इसलिए आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 8 (1)के तहत इनका खुलासा नहीं किया जा सकता ।
धारा ऐसी सूचना के खुलासे को प्रतिबंधित करती है जिससे भारत की संप्रभुता और अखंडता, सुरक्षा, देश के रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों, विदेशी राष्ट्र से संबंधों को खतरा पहुंचने का जोखिम हो या जिससे अपराध को उकसावा मिलता हो। गृह मंत्रालय ने इसी नियम का हवाला देते हुए राज्य में अफ्सपा लगाने के लिए अपने द्वारा जारी अधिसूचना को सुपरसीड करने के फैसले से संबंधित जानकारी और फाइल नोटिंग्स का ब्यौरा देने से भी इनकार कर दिया ।
मंत्रालय ने हालांकि कहा कि उसे अधिसूचना के विरोध या समर्थन करने पर किसी से भी कोई अभिवेदन, याचिका या निवेदन नहीं मिला है । इसने अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की राज्य सरकारों द्वारा 2014 से एक फरवरी 2015 तक की अवधि के दौरान सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत प्रतिपूर्ति राशि मांगने के लिए जमा किए गए दस्तावेजों या रिकॉर्ड का ब्यौरा देने से भी इनकार कर दिया ।
मंत्रालय ने कहा कि सूचित किया जाता है कि एसआरई की एक योजना है जिसके दायरे में मिजोरम और सिक्किम को छोड़कर सभी पूर्वोत्तर राज्य आते हैं । उग्रवाद प्रभावित राज्यों में सुरक्षा प्रणाली का सहयोग करने पर होने वाले खर्च के मद्देनजर एसआरई प्रतिपिूर्ति की जाती है। मंत्रालय ने कहा कि क्योंकि एसआरई प्रकृति में संवेदनशील है, जिसे आरटीआई अधिनियम के पैरा 8 (ए) के तहत खुलासे से छूट प्राप्त है ।
जवाब में कहा गया कि एसआरई प्रतिपूर्ति का ब्यौरा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जा सकता । लेकिन एसआरई के तहत जारी वर्ष-वार और राज्यवार व्यय संबंधी ब्यौरा पिछले वर्षों में गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है ।