मणिपुर पिछले चार महीनों से जल रहा है, अब तक 170 लोगों की मौत हो चुकी है। अभी भी आए दिन हिंसा की घटनाएं प्रशासन के सामने सीधी चुनौती खड़ी कर रही हैं। तमाम प्रयास जमीन पर फेल नजर आए हैं, सुरक्षाबलों की ज्यादा तैनाती भी कुछ खास असर नहीं डाल पाई है। लेकिन अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, उसकी तरफ से कर्नल (सेवानिवृत्त) नेक्टर संजेनबम को पांच साल के कार्यकाल के लिए मणिपुर पुलिस विभाग में बतौर वरिष्ठ अधीक्षक नियुक्त किया गया है।

मणिपुर में हालात सुधारने के लिए बड़ा कदम

जानकारी के लिए बता दें कि नेक्टर संजेनबम ने साल 2015 में म्यांमार में सर्जिकल स्ट्राइक में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने 21 पैरा (विशेष बल) कई सालों तक अपनी सेवा दी है और उन्हें कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया गया है। अब सरकार को एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर की जरूरत इसलिए पड़ी है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में एक बार फिर हिंसा का दौर देखने को मिला है। 30 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं, कई ने अपनी जान भी गंवाई है।

एन बीरेन सिंह की सरकार जानती है कि उसकी छवि को पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है, ऐसे में अब बिगड़े हालात पर काबू पाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइकल वाले अफसर की मदद ली जा रही है। अब किस तरह से नेक्टर संजेनबम अपनी रणनीति को अंजाम तक पहुंचाते हैं, कब तक वे फिर शांति को स्थापित कर पाते हैं, इस पर सभी की नजर रहने वाली है।

मणिपुर में विवाद की जड़ क्या है?

वैसे इस पूरे मामले की जड़ भी मणिपुर का वो विवाद है जो वैसे तो कई सालों से चला आ रहा है, पिछले कुछ महीनों ने इसने अपना रौद्र रूप दिखा दिया है। असल में मणिपुर में तीन समुदाय सक्रिय हैं- इसमें दो पहाड़ों पर बसे हैं तो एक घाटी में रहता है। मैतेई हिंदू समुदाय है और 53 फीसदी के करीब है जो घाटी में रहता है। वहीं दो और समुदाय हैं- नागा और कुकी, ये दोनों ही आदिवासी समाज से आते हैं और पहाड़ों में बसे हुए हैं। अब मणिपुर का एक कानून है, जो कहता है कि मैतेई समुदाय सिर्फ घाटी में रह सकते हैं और उन्हें पहाड़ी क्षेत्र में जमीन खरीदने का कोई अधिकार नहीं होगा। ये समुदाय चाहता जरूर है कि इसे अनुसूचित जाति का दर्जा मिले, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है।

कोर्ट का एक ऑर्डर कैसे बना मुसीबत

हाल ही में हाई कोर्ट ने एक टिप्पणी में कहा था कि राज्य सरकार को मैतेई समुदाय की इस मांग पर विचार करना चाहिए। उसके बाद से राज्य की सियासत में तनाव है और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। ऐसे ही एक आदिवासी मार्च के दौरान बवाल हो गया और देखते ही देखते हिंसा भड़क गई।