वैसे तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कई बार भारत को गौरवान्वित होने का मौका दिया है और विभिन्न अभियानों के जरिये अंतरिक्ष के क्षेत्र में दुनिया को भारत की क्षमताओं से परिचित करवा चुका है। इस बार इसरो एक ऐसे अनोखे मिशन की तैयारी कर रहा है जो विश्व में अपनी तरह का पहला प्रयास होगा और सफल रहने पर यह विश्वकीर्तिमान भी होगा। वर्ष 2017 की शुरुआत में इसरो एक ही रॉकेट से 83 सेटेलाइट लांच कर विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। इन सेटेलाइट्स में दो भारतीय और बाकी दूसरे देशों की होंगी।
इसरो की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक राकेश शशिभूषण ने यहां कहा, ‘वर्ष 2017 की पहली तिमाही के दौरान एक रॉकेट के जरिये 83 सेटेलाइट लांच किए जाएंगे। ज्यादातर विदेशी सेटेलाइट नैनो सेटेलाइट हैं। सभी सेटेलाइट एक ही कक्षा में स्थापित किए जाएंगे।’ शशिभूषण ने बताया कि विभिन्न विदेशी सेटेलाइट की लांचिंग के जरिये एंट्रिक्स 500 करोड़ रुपये कमा चुका है। 500 करोड़ रुपये के अगले लांच ऑर्डर के लिए बातचीत चल रही है।
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इस अभियान के लिए इसरो अपने सबसे भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी (पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल) के एक्सएल संस्करण को इस्तेमाल करेगा। शशिभूषण ने बताया कि पीएसएलवी-एक्सएल कुल 1600 किलोग्राम वजन लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। एक साथ कई सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजना इसरो के लिए नई बात नहीं है। वह पहले भी कई बार इस तरह के अभियान अंजाम दे चुका है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अगले साल चांद पर दूसरा मिशन ‘चंद्रयान-2’ भी भेजने जा रहा है। ‘चंद्रयान-2’ के साथ इसरो एक टेलीस्कोप भी भेजने की योजना बना रहा है। अगर योजना कामयाब हो गई तो पृथ्वी से 3,84,400 किलोमीटर दूर चांद पर होगी भारत की तीसरी आंख जो अंतरिक्ष में नई खोज में मदद देगी। पिछले साल सितंबर में भारत वेबलेंथ पर काम करने वाले टेलीस्कोप स्ट्रोसेट को अंतरिक्ष में लगा चुका है। यह ब्लैक होल्स और न्यूट्रॉन स्टार का अध्य्यन कर रहा है।
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