प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विज्ञान और तकनीक देश की प्राथमिकता होनी चाहिए क्योंकि विज्ञान और तकनीक ने गरीबी दूर करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। वैज्ञानिक देश की कायापलट कर सकते हैं। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने हमेशा विज्ञान और तकनीक को प्राथमिकता देते हुए भारत को सशक्त बनाने की कोशिश की थी।

शनिवार को मुंबई विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित 102वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया। इसी मौके पर उन्होंने ये बातें कहीं। तीन से सात जनवरी तक चलनेवाली विज्ञान कांग्रेस में देश-विदेश से 12 हजार से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ वैज्ञानिक वसंत गोवारीकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। 81 साल के गोवारीकर का शुक्रवार को पुणे में निधन हो गया। गोवारीकर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और इसरो के प्रमुख होने के अलावा 90 के दशक में प्रधानमंत्री के तकनीक सलाहकार भी रहे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के जरिए हमने कई सवालों को हल किया। मनुष्य का विकास विज्ञान और तकनीक से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के विकास में विज्ञान का उल्लेखनीय योगदान है और विज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि विज्ञान के जरिए ही आधुनिक भारत का सपना सच साबित होगा। शोधकर्ताओं के कारण हमारे देश ने कई क्षेत्रों में प्रगति की है। शोध में वैज्ञानिकों को किसी तरह की रुकावट ना आए और आर्थिक कमी ना हो इसका ध्यान रखने की बात भी प्रधानमंत्री ने कही। उन्होंने इसके लिए निजी क्षेत्र से भी सामने आने की अपील की।

भारतीय विज्ञान कांग्रेस में 32 चर्चा सत्र और 14 अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े परिसंवाद होंगे। इन क्षेत्रों में कृषि, वन, पशु, रसायन, पर्यावरण, सूचना और संचार आदि शामिल हैं। विज्ञान कांग्रेस की थीम मानव विकास के लिए विज्ञान और तकनीक रखी गई है। समारोह में रविवार को महिला कांग्रेस का उद्घाटन होगा। विज्ञान कांग्रेस के लिए बांद्रा कुर्ला संकुल के एमएमआरडीए मैदान पर विज्ञान प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

मोदी ने वैज्ञानिक समुदाय से लालफीताशाही खत्म करने और विश्वविद्यालयों को ज्यादा शैक्षणिक स्वतंत्रता व स्वायत्तता देने का वादा करते हुए कहा कि अनुसंधान में सहूलियत व्यापार करने में सहूलियत जितनी ही महत्वपूर्ण है। साथ ही कारपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत विज्ञान व प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल संपर्क स्कूल जाने के बराबर ही एक बुनियादी अधिकार होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इसके लिए समाज में विज्ञान के साथ लगाव को पुनर्जीवित करने और बच्चों में इसके प्रति प्रेम जगाने के प्रयासों की मांग की।

प्रधानमंत्री ने नौकरशाही संबंधी बाधाओं और अनुसंधान में धन संबंधी मुश्किलों की शिकायत करने वाले वैज्ञानिकों की ओर इशारा करते हुए कहा, हम चाहते हैं कि हमारे वैज्ञानिक सरकार की प्रक्रियाओं की नहीं बल्कि विज्ञान की गुत्थियां सुलझाएं। हम चाहते हैं कि वे प्रकाशन पर ध्यान दें ना कि सरकारी मंजूरियों पर। धन संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी मिलने में ज्यादा देरी नहीं लगनी चाहिए। जरूरतों को अनुसंधान से ज्यादा जटिल नहीं होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने विशेषकर बच्चों में प्रौद्योगिकी का ज्ञान फैलाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा-हमें इंटरनेट का इस्तेमाल कर अपने वैज्ञानिकों को अपने बच्चों व युवाओं के सीधे संपर्क में लाना चाहिए। डिजिटल संपर्क स्कूल जाने के बराबर ही एक बुनियादी अधिकार होना चाहिए। विज्ञान व प्रौद्योगिकी गतिविधि में निवेश कारपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत व्यय का हिस्सा बनना चाहिए जिसमें सीधे या किसी स्वायत्त निधि के माध्यम से धन दिया जा सके।

प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों को अनुसंधान व विकास गतिविधि में बहुत आगे रखने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इस समय इस क्षेत्र में निवेश केंद्र सरकार की एजंसियों ‘तक ही ज्यादा केंद्रित’ है। इसे व्यापक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा-हमारे विश्वविद्यालयों को अत्यधिक नियमों व बोझिल प्रक्रियाआें से मुक्त करना चाहिए। वहां ज्यादा शैक्षणिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता होनी चाहिए। वहां शिक्षण के बराबर ही अनुसंधान पर भी जोर देना चाहिए। इसके जवाब में विश्वविद्यालयों को भी शैक्षणिक उत्कृष्टता व जवाबदेही के उच्च स्तरों का पालन करना चाहिए।

मोदी ने राष्ट्रीय विकास का एक औजार बनाने की दिशा में विज्ञान व प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भूमिका पर कहा-आजादी की पहली किरण के साथ प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विज्ञान व प्रौद्योगिकी को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में रखा। हमारे वैज्ञानिकों ने उच्च स्तर के अनुसंधान शुरू किए और कम संसाधनों के साथ असाधारण संस्थानों का निर्माण किया जो अब भी अच्छी सेवा दे रहे हैं।

गरीबी कम करने, भूखमरी से निपटने और बीमारियों पर विजय हासिल करने में वैज्ञानिकों की भूमिका की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि विज्ञान व प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय सीमाओं को हटा सकती है, दुनिया को एक कर सकती है और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साझा प्रयास के तहत देशों को साथ ला सकती है। उन्होंने साथ ही सचेत किया कि विज्ञान असमानता को भी बढ़ा सकता है, युद्धों को ज्यादा मारक कर सकता है और पर्यावरण को क्षति पहुंचा सकता है।

मोदी ने हालांकि कहा कि मानव विकास भारतीय वैज्ञानिक खोज का ‘बड़ा उद्देश्य और बढ़ावा देने वाला बल’ रहा है। उन्होंने कहा-हमें अपने देश में विज्ञान व वैज्ञानिकों का गौरव और सम्मान बहाल करना चाहिए, समाज में विज्ञान के प्रति लगाव को पुनर्जीवित करना चाहिए, अपने बच्चों में इसके प्रति प्रेम को जागृत करना चाहिए और अपने वैज्ञानिकों को सपने देखने, कल्पना और खोज की दिशा में प्रोत्साहित करना चाहिए। आपको मुझसे बेहतर समर्थक नहीं मिलेगा। पांच दिनों के इस कार्यक्रम में दुनिया भर का वैज्ञानिक समुदाय चर्चाओं व प्रस्तुतियों में शामिल होगा। यह कार्यक्रम 45 साल के अंतराल के बाद शहर में आयोजित हो रहा है।