वेतन और शिक्षा में कम होते लैंगिक अंतर की वजह से, भारत लैंगिक समानता सूचकांक में 21 पायदान ऊपर उठा है। मगर भारत अभी भी 144 देशों में निराशाजनक 87वें स्थान पर है। वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम द्वारा दी गई रैंकिंग में पाकिस्तान एक बार फिर से नीचे से दूसरे पायदान पर है। मंगलवार को रिलीज हुई ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2016 के मुताबिक, भारत ने पूरी तरह से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा दाखिले में लैंगिक अंतर को खत्म कर दिया है। दक्षिण एशिया के अन्य देशों पर नजर डालें तो बांग्लादेश 72वें स्थान पर हैं, श्रीलंका 100वें, नेपाल 110वें, मालदीव 115वें और भूटान 121वें नंबर पर है। पाकिस्तान से नीचे की रैंकिंग पाने वाला इकलौता देश यमन है, जो इस सूची में 144वें स्थान पर है। वैश्विक स्तर पर टॉप-4 देशाें में स्कैंडिनेवियाई देश शामिल हैं। आइसलैंड टॉप पर हैं, जिसके बाद फिनलैंड, नार्वे और स्वीडन का नंबर आता है। अमेरिका 45वें नंबर पर है।
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ब्रिक्स देशों में दक्षिण अफ्रीका 15वें, रूस 75वें, ब्राजील 79वें और चीन 99वें स्थान पर है। चीन पिछले साल 91वें पायदान पर था, जो कि 2014 की उसकी रैंकिंग (87) से कम था। अब चीन और नीचे खिसक गया है। ग्लोबल जेंडर गैर रिपोर्ट 2014 में ‘आर्थिक भागीदारी और अवसर’, ‘शिक्षा प्राप्ति’, ‘स्वास्थ्य और जीवन रक्षा’ और ‘राजनीतिक भागीदारी’ में लैंंगिक असमानता पर रिपोर्ट पेश की गई है। आर्थिक भागेदारी में भारत पिछले साल की रैंकिंग (139) से थोड़ा बेहतर स्थिति (136) में पहुंच गया है। शिक्षा में भारत को 113वां स्थान मिला है, जो कि पिछले साल 125वां था। स्वास्थ्य में भारत की हालत निराशाजनक रही है क्योंकि पिछले साल से सिर्फ एक पायदान ऊपर की बढ़त हासिल हुई है। राजनैतिक भागीदारी में भारत 9वें स्थान पर हैं, पिछले साल भी भारत इसी पायदान पर था।
2015 में ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट डाटा पर आधारित अनुमानों के मुताबिक, आर्थिक अंतर खत्म करने में 118 साल लग सकते हैं। हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्कप्लेस पर लैंगिक समानता लाने की संभावना 2186 तक बढ़ गई है।

