संचार सेवाओं को विस्तार देने वाली भारतीय अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाते हुए नवीनतम उपग्रह जीसैट-16 का आज तड़के फ्रेंच गुयाना के कोरू प्रक्षेपण स्थल से एरियनस्पेस रॉकेट की मदद से सफल प्रक्षेपण किया गया। मौसम में खराबी के चलते इस प्रक्षेपण में दो दिन की देरी हुई। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संचार उपग्रह जीसैट-16 के सफल प्रक्षेपण के लिए वैज्ञानिकों की सराहना की और कहा कि यह देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण साधन साबित होगा।

आज तड़के दो बजकर दस मिनट पर विमान वीए221 के जरिए एरिएन-5 की सफल उड़ान के 32 मिनट बाद उपग्रह को जीओसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में प्रवेश करा दिया गया। प्रक्षेपण स्थल से एरियन श्रेणी के यानों द्वारा किया गया यह 221वां प्रक्षेपण है।

एरियनस्पेस ने कहा कि दोहरे रॉकेट अभियान के तहत प्रक्षेपित किया गया जीसैट-16 अपने साथ गए डायरेक्ट टीवी-14 अंतरिक्ष यान के चार मिनट बाद अंतरिक्ष में प्रवेश कर गया। जीसैट-16 में 48 ट्रांसपांडर लगे हैं और यह संख्या इसरो द्वारा बनाए गए किसी भी संचार उपग्रह में लगाए गए ट्रांसपांडरों की संख्या से ज्यादा है। डायरेक्ट टीवी-14 अमेरिका में ‘डायरेक्ट-टू-होम टीवी’ के प्रसारण के लिए है।

प्रक्षेपण के कुछ ही समय बाद कर्नाटक के हासन स्थित इसरो की ‘मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी’ (नियंत्रक प्रतिष्ठान) ने जीसैट-16 की कमान और नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया और कहा कि शुरूआती जांच में उपग्रह ‘सामान्य हालत’ में पाया गया है।

इसरो ने कहा कि इसे कक्षा में ऊपर उठाने का पहला कदम (ऑर्बिट रेजिंग) कल तड़के तीन बजकर 50 मिनट पर होना तय है। यह प्रक्रिया उपग्रह को उसके तय स्थान पर यानी भूस्थैतिक कक्षा में 55 डिग्री पूर्वी देशांतर पर और जीसैट-8, आईआरएनएसएस-1ए एवं आईआरएनएसएस-1बी के साथ स्थापित करने का एक चरण है।

जीसैट-16 का प्रक्षेपण मूल रूप से शुक्रवार को होना था लेकिन कोरू में खराब मौसम के कारण उड़ान से कुछ ही घंटे पहले इसे रोक दिया गया। कोरू की भौगोलिक स्थिति रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण है। भूमध्य रेखा के पास स्थित होने की वजह से यह स्थान भूस्थैतिक कक्षक में भेजे जाने वाले अभियानों के लिए खास तौर पर उपयुक्त है।

एरियनस्पेस ने प्रक्षेपण के इस कार्यक्रम का समय बदलकर भारतीय समयानुसार तड़के दो बजकर नौ मिनट का कर दिया था लेकिन कुछ ही घंटों बाद इसे एक बार फिर ‘खराब मौसम’ के कारण स्थगित कर दिया गया। इसके बाद इसके प्रक्षेपण का समय आज तड़के के लिए रखा गया।

इसरो उपग्रह केंद्र (आईएसएसी) के निदेशक एस के शिवकुमार ने एरियनस्पेस प्रतिष्ठान में कहा, ‘‘इसके फलीभूत होने के लिए हमें दो दिन का इंतजार करना पड़ा लेकिन यह उत्कृष्ट तरीके से संपन्न हुआ है। इसलिए इसके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए एरियनस्पेस के सभी लोगों को बधाई।’’

एरियनस्पेस ने कहा कि आज का यह प्रक्षेपण एरियन 5 का लगातार 63वां सफल प्रक्षेपण है। एरियनस्पेस की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि जीसैट-16 एक बहुप्रयोगी दूरसंचार उपग्रह है, जिसके दायरे में पूरा भारतीय उपमहाद्वीप होगा। एरियनस्पेस द्वारा प्रक्षेपित यह इसरो का 18वां उपग्रह है।

एरियनस्पेस ने सबसे पहले वर्ष 1981 में इसरो के एप्पल प्रायोगिक उपग्रह का प्रक्षेपण किया था।कक्षा में प्रवेश की घोषणा के कुछ ही पलों बाद एरियनस्पेस के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन इस्राएल ने कहा, ‘‘आज, अपने दो वफादार ग्राहकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हमें गर्व है।’’

शिवकुमार ने कहा कि एरियनस्पेस की ओर से अंत:क्षेपण (इंजेक्शन)के संदर्भ में दिए गए आश्वासन को निभाया गया है। अगले कुछ दिनों में द्रव एपोजी मोटर क्रियान्वयन समेत अन्य प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा।

शिवकुमार ने कहा, ‘‘इसके बाद ऑर्बिट टेस्टिंग के तहत दूरसंचार पेलोड सिस्टम पर काम किए जाने की योजना है। हमें उम्मीद है कि इस साल के अंत तक अंतरिक्ष यान सेवाओं के लिए तैयार हो जाएगा।’’

जीसैट-16 में 24 सी-बैंड, 12 केयू-बैंड और 12 अपर एक्स्टेंडेड सी-बैंड ट्रांसपांडर हैं, जो सरकारी और निजी टीवी एवं रेडियो सेवाओं, वृहद स्तरीय इंटरनेट और टेलीफोन के संचालन को बढ़ावा देंगे।

जीसैट-16 में लगे 48 ट्रांसपांडरों से राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षमता में सुधार होगा और यह संख्या इसरो के मौजूदा 180 ट्रांसपांडरों के साथ जुड़ जाएगी।
क्षमता की कमी के चलते इसरो ने टीवी प्रसारकों जैसे निजी क्षेत्र के प्रयोगकर्ताओं के लिए 95 ट्रांसपांडर विदेशी उपग्रहों से पट्टे पर लिए हुए हैं। निजी क्षेत्र के प्रयोगकर्ता अक्सर अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आवश्यक ट्रांसपांडर क्षमता के अपर्याप्त होने की शिकायत करते रहे हैं।

आज का यह प्रक्षेपण इस साल जनवरी में जीसैट-14 के प्रक्षेपण के 11 माह बाद हुआ है। जीसैट-15 का प्रक्षेपण अगले साल अक्तूबर में होना है।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘मैं बताना चाहूंगा कि हम जीसैट-15 अंतरिक्ष यान के साथ कोरू लौटेंगे। इसरो उपग्रह केंद्र में इसे अग्रिम चरण के तहत संकलित किया जा रहा है और हम योजना के अनुरूप परीक्षण कर रहे हैं। वर्ष 2016 की तीसरी तिमाही में इसके प्रक्षेपण के लिए तैयार हो जाने की संभावना है।’’

इसरो ने कहा कि जीसैट-16 को 36 हजार किलोमीटर की उच्च्ंचाई वाली भूस्थैतिक कक्षा तक उठाया जाएगा। इस कार्य को एलएएम इंजन के माध्यम से ऑर्बिट रेजिंग की तीन प्रक्रियाओं के जरिए अंजाम दिया जाएगा।

इसरो ने कहा, ‘‘आठ दिसंबर को होने वाले प्रथम प्रणोदन के लिए तैयारियां जारी हैं। उपग्रह को 12 दिसंबर को भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा और इसके बाद उपग्रह के संचार ट्रांसपांडरों को चालू कर दिया जाएगा ताकि ऑर्बिट टेस्टिंग की जा सके।’’

भारत के पीएसएलवी और मौजूदा जीएसएलवी रॉकेटों में दो टन से ज्यादा वर्ग के उपग्रहों का प्रक्षेपण करने की क्षमता नहीं है। इस वजह से इसरो को बाहर से प्रक्षेपण कराना पड़ा।

इसरो अगला बड़ा प्रक्षेपक जीएसएलवी-एमके3 विकसित कर रहा है, जो चार टन तक के उपग्रहों को कक्षा में ले जा सकता है। जुलाई 2013 में सरकार ने जीसैट-16 को मंजूरी दी थी, जिसकी प्रक्षेपण लागत और बीमा कुल 865.50 करोड़ रुपए है।

एरियन के पेलोड की क्षमता 10,200 किलोग्राम से अधिक है। यह जीसैट-16 और डायरेक्ट टीवी-14 के साथ कुल 9,480 किलोग्राम का वजन लेकर गया। कक्षा में जीसैट-16 का जीवनकाल 12 साल है।

आगामी दिनों में सौर पैनल, एंटीना और उपग्रह की धुरी स्थिरता के लिए काम किया जाएगा। जीसैट-16 अपने तय समय से पहले बीते अप्रैल में ही निष्क्रिय हो चुके इनसैट-3ई की जगह लेगा।

जीसैट-16 के सफल प्रक्षेपण पर प्रधानमंत्री ने की वैज्ञानिकों की सराहना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संचार उपग्रह जीसैट-16 के सफल प्रक्षेपण के लिए वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि यह देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण साधन साबित होगा।

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘जीसैट-16 के सफल प्रक्षेपण के लिए हमारे वैज्ञानिकों को बधाई। यह संचार उपग्रह हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बनेगा।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘सफल प्रक्षेपण के बाद जीसैट-16 अच्छी हालत में है। हासन स्थित इसरो की ‘मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी’ (नियंत्रक प्रतिष्ठान) ने उपग्रह का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है।’’

जीसैट-16 को आज तड़के फ्रेंच गुयाना स्थित प्रक्षेपण केंद्र कोरू से एरियनस्पेस रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया।
दोहरे रॉकेट अभियान के तहत प्रक्षेपित किया गया जीसैट-16 अपने साथ गए डायरेक्ट टीवी-14 अंतरिक्ष यान के चार मिनट बाद अंतरिक्ष में प्रवेश कर गया।

जीसैट-16 में 48 ट्रांसपांडर लगे हैं और यह संख्या इसरो द्वारा बनाए गए किसी भी संचार उपग्रह में लगाए गए ट्रांसपांडरों की संख्या से ज्यादा है। डायरेक्ट टीवी-14 अमेरिका में ‘डायरेक्ट-टू-होम टीवी’ के प्रसारण के लिए है।

जीसैट-16 एक बहुप्रयोगी संचार उपग्रह है, जिसके दायरे में समूचा भारतीय उपमहाद्वीप होगा।