पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश और उनकी पत्नी को चुनाव आयोग से गोवा में वोटर लिस्ट के चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के संबंध में अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए नोटिस प्राप्त होने के कुछ दिनों बाद संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने सोमवार को एक “स्पष्टीकरण” जारी किया।
जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि उनके गणना फॉर्म में पिछली एसआईआर से संबंधित अनिवार्य विवरण की जानकारी नहीं दी गई थी। आयोग ने रिटायर के बाद से गोवा में रह रहे अरुण प्रकाश को एसआईआर प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान बताने के लिए बुलाया था।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई थी चिंता
सशस्त्र बलों से रिटायर हुए कर्मियों सहित कई लोगों ने अरुण प्रकाश को इस तरह का नोटिस भेजे जाने पर सोशल मीडिया पर चिंता व्यक्त की थी। बता दें कि अरुण प्रकाश को 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनकी भूमिका के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने बताई पूरी बात
निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी डॉ. मेडोरा एरमोमिला डी कोस्टा ने स्पष्टीकरण में कहा, “एसआईआर के दौरान जारी नोटिस से संबंधित मीडिया की खबरों के संदर्भ में यह बताया जाता है कि प्रक्रिया के दौरान कोर्टालिम विधानसभा के भाग संख्या 43 के बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) ने अरुण प्रकाश से संबंधित गणना फॉर्म लिया गया था।” उन्होंने कहा, “यह देखा गया कि उक्त गणना फॉर्म में पिछले एसआईआर से संबंधित अनिवार्य जानकारी नहीं बताई गई थी, इसमें मतदाता का नाम, ईपीआईसी नंबर, रिश्तेदार का नाम, विधानसभा क्षेत्र का नाम और संख्या, भाग संख्या और मतदाता सूची में क्रम संख्या शामिल हैं।”
‘सिस्टम ने अनमैप कैटेगरी में रखा’
अधिकारी ने बताया कि इन आवश्यक पहचान विवरणों के अभाव में ‘बीएलओ एप्लिकेशन’ प्रस्तुत गणना फॉर्म और मौजूदा मतदाता सूची डेटाबेस के बीच आटोमैटिक संबंध स्थापित करने में असमर्थ था। स्पष्टीकरण में कहा गया है, “चूंकि पिछली एसआईआर से संबंधित सभी जानकारियां नहीं दी गई थीं, इसलिए सिस्टम ने गणना फॉर्म को ‘अनमैप’ कैटेगरी में रखा गया था।”
डी कोस्टा ने आगे कहा, “बीएलओ एप्लिकेशन को इस तरह से बनाया गया है कि यह निर्धारित पहचान विवरण सही तरीके से भरे जाने पर ही गणना फॉर्म का खुद से मिलान करता है, जिससे मौजूदा वोटर लिस्ट से वेरीफिकेशन संभव हो पाता है। यदि गणना फॉर्म का मिलान नहीं हो पाता है, तो एसआईआर प्रक्रिया के तहत सुनवाई सिस्टम के माध्यम से आगे वेरीफिकेशन अनिवार्य है।”
डी कोस्टा ने कहा कि मानक, सिस्टम-आधारित प्रक्रिया के मुताबिक, मतदाता के विवरण के सत्यापन और पात्रता की पुष्टि के लिए उचित अवसर सुनिश्चित करने के लिए सुनवाई नोटिस ऑटोमेटिक रूप से तैयार करके जारी किया गया था।
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