केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि केवल एसबीआई ने सवा दो दिन 58 लाख लोगों के नोट बदले हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी 2000 के नोटों के लिए एटीएम मशीनों में बदलाव नहीं किए गए हैं। एटीएम मशीनों में बदलाव अभी प्रक्रिया में हैं। जेटली ने कहा, ‘बड़े नोटों बंद किए जाने के बाद लगातार नकदी की कमी की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। यह चलन में रही 86 प्रतिशत मुद्रा को बदलने के लिए व्यापक स्तर पर चलाया गया अभियान है। एसबीआई अकेले में पिछले दो दिन में 47,868 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। सभी बैंकों की कुल जमा करीब 2 से 2.25 लाख करोड़ रुपए के बीच होनी चाहिए। रिजर्व बैंक, बैंकों के सभी 4,000 खजानों में पर्याप्त मुद्रा है। पिछले एक साल में सिर्फ सितंबर महीने में बैंक जमा में बढ़ोतरी की वजह अगस्त में जारी किया गया सातवें वेतन आयोग का बकाया है। आभूषण विक्रेताओं से चलन से बाहर हो चुकी मुद्रा में किए गए सौदों का ब्योरा मांगा गया है। सरकार सर्राफा में कोई गैरकानूनी कारोबार नहीं होने देगी। वित्त मंत्री ने लोगों से अपील की कि पुराने नोटों को धीरे-धीरे जमा करें। बैंकों में भीड़ न बढ़ाएं। 2,000 के नोट में चिप, डिजिटल लॉकर्स एक मनगढंत अफवाह है।’ साथ ही उन्होंने बताया कि नए 2,000 और 500 के नोटों के लिए दो लाख एटीएम को व्यवस्थित करने में दो-तीन सप्ताह का समय लगेगा।

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जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला, ‘जब सरकार ने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का फैसला किया तो यह यह स्वभाविक है कि यह भी अपेक्षा थी कि 14 लाख करोड़ रुपए के नोट बदलवाने के लिए लोग बैंक पहुंचेंगे। यह बहुत बड़ा ऑपरेशन था। अभी यह शुरु हुआ है। ये कितना बड़ा होगा, इसकी कल्पना में एक दो उदाहरण देकर समझाना चाहता हूं। हम लोग हर बैंक से डाटा मंगवाते हैं। लेकिन बैंक के अधिकारी अभी अपने कामों में जुट रहे हैं तो डाटा देने में उनका ज्यादा समय नहीं खर्च करेंगे। हर दिन दो-तीन बार आंकड़ें नहीं मंगवाते। हम लोग चाहते हैं कि बैंक कर्मचारी अपने काम पर फोकस करें। केवल एसबीआई बैंक ने 2.28 करोड़ ट्रांसजेक्शन किया है। अब इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि पूरा बैंकिंग सिस्टम कितनी मात्रा में लोगों को सर्विस दे रहा है।’