पांच साल की बच्ची से रेप के मामले में कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को फटकार लगाई है। वारदात के बाद केस दर्ज कराने के लिए पीड़िता एक से दूसरे पुलिस स्टेशन दौड़ती रही। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह बेहद पीड़ा देने वाली बात है। बच्ची को या तो अस्पताल में दाखिल कराना था या फिर उसे घर लेकर जाना था।

पांच साल की बच्ची के साथ 1 मार्च 2015 में रेप की वारदात हुई थी। 34 वर्षीय आरोपी बच्ची को को अगवा करके आरे के जंगलों में ले गया और वहां उसके साथ वारदात की। उसके बाद वह फरार हो गया। सीसीटीवी फुटेज के साथ अन्य मेडिकल, फारेंसिक एविडेंस के आधार पर उसे दोषी ठहराया गया था।

आरोपी के वकील ने ट्रायल के दौरान उस पुलिस स्टेशन के ज्यूरिडिक्शन पर सवाल उठाए, जिसमें केस दर्ज किया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस पर बहुत सारी बातें हो चुकी हैं। कोर्ट ने आरोपी को बच्ची को अगवा करके उसके साथ रेप करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

पांच साल की बच्ची को वारदात के बाद तीन पुलिस थानों में ले जाया गया, जिससे रिपोर्ट दर्ज कराई जा सके। उसे पहले एमआईडीसी थाने ले जाया गया। ज्यूरिडिक्शन का सवाल उठने पर वह परिजनों के साथ आरे थाने गई और आखिर में उसका केस सहर थाने में दर्ज किया गया। बच्ची के शरीर पर चोटों के निशान थे। इलाज के लिए तीन माह तक उसे अस्पताल में दाखिल रहना पड़ा।