जम्मू कश्मीर विधानसभा की त्रिशंकु तस्वीर सामने आई है, हालांकि पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है और उसके पास भाजपा या कांग्रेस किसी से हाथ मिलाने का विकल्प है। दूसरी ओर झारखंड में भाजपा अपनी सहयोगी के साथ सरकार बनाने की स्थिति की ओर बढ़ रही है।
जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जोरदार चुनावी प्रचार करने के बावजूद भाजपा घाटी में बड़ी सफलता हासिल करने में नाकाम रही है, लेकिन जम्मू क्षेत्र में उसने अपना वर्चस्व स्थापित किया है। वह जम्मू की 37 सीटों में से तीन पर जीत चुकी है और 22 पर आगे चल रही है। राज्य की 87 सदस्यीय विधानसभा में पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। वह 33 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार बनाने के लिए कांग्रेस या फिर भाजपा का साथ ले सकते हैं। कांग्रेस 11 सीटों पर आगे है और एक सीट जीत चुकी है। साल 2002 में कांग्रेस और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई थी।
पीडीपी से गठबंधन के लिए तैयार है कांग्रेस
जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस 11 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। साल 2008 के चुनाव में उसे 28 सीटें मिली थीं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सोनवार सीट पर चुनाव हार गए हैं और बीरवाह में पीछे चल रहे हैं।
पीडीपी के वरिष्ठ नेता मुजफ्फर बेग ने मिलाजुला संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की तुलना में कांग्रेस के साथ जाना उनकी पार्टी के लिए आसान रहेगा, लेकिन वह महसूस करते हैं कि भाजपा को ‘अछूत’ नहीं माना जा सकता।
जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान संभालने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पीडीपी के साथ गठबंधन का विकल्प खुला हुआ है।
उमर अब्दुल्ला सोनवार से हारे, बीरवाह सीट से जीते
झारखंड में भाजपा और सुदेश महतो की अगुवाई वाली आजसू का गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। भाजपा 81 सदस्यीय विधानसभा में 35 पर आगे चल रही है, जबकि आजसू चार सीटों पर आगे है।
सत्तारूढ़ झामुमो एक सीट जीत चुकी है और 18 पर आगे चल रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बरहैट सीट पर आगे हैं और दुमका में पीछे चल रहे हैं। कांग्रेस सात सीटों पर आगे है और उसकी सहयोगी राजद दो सीटों पर आगे चल रही है। झारखंड में इससे पहले 2005 और 2009 के चुनावों में त्रिशंकु विधानसभा थी।
झारखंड में 2009 में पिछले चुनाव में भाजपा ने 18 सीटें जीती थीं। चुनाव में झामुमो को 18, कांग्रेस को 14, जेवीएम (पी) को 11, आजसू को 5, राजद को 5, जदयू को 2 सीटें मिली थीं। निर्दलीय उम्मीवार आठ सीटों पर विजयी रहे थे।
