मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले से पूरे देश में लोगों की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों के सामने दैनिक जरुरतों को पूरा करने की समस्या खड़ी हो गई है। पैसों के लिए बैंकों और एटीएम में लंबी-लंबी लाइनें लग रही है। लेकिन लोगों को सुबह से शाम तक खड़े रहने के बाद भी पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल नार्थ इस्ट के सातों राज्यों का भी है। यहां लोगों नोटबंदी से बुरी तरह से प्रभावित हुए है। इन राज्यों में जरुरत की चीजें लेकर जाने वाली गाड़ियां पैसे नहीं होने के कारण फंसी हुई हैं। कैश की समस्या से बचने के लिए मिजोरम के एक गांव ने अनोखी तरीब निकाली है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मिजोरम के खावबुंग गांव में नोटबंदी के असर से निपटने के लिए पैसे की जगह कागज की चिट चलाई जा रही है। यहां गांव के दुकानदार लोगों को दैनिक जरुरतों की चीजें इन चिट्स के आधार पर दे रहे हैं। इन पर्चियों पर स्थानीय भाषा में पैसे लिखे गए हैं और उसमें नीचे खरीददार के साइन हैं। इस कैशलेस ट्रांजेक्शन का आइडिया गांव में ही एक हार्डवेयर की दुकान चलाने वाले पीसी मचुआना ने दिया था। उन्होंने गांव के अन्य लोगों से इस बारे में चर्चा की और लोगों को इसके लिए राजी किया। उनका कहना है इस दिक्कत के समय में हमने एक वैकल्पिक व्यवस्था की है। इनके सुझाव को मानते हुए दुकानदारों और सब्जीवालों ने शनिवार से पैसे की जगह कागज लेना का शुरू कर दिया। कहा जा रहा है कि यह एक क्लोस्ड कम्युनिटी है, जिसमें सभी लोग एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं इसलिए यह आइडिया यहां कामयाब है।
हालांकि मिजोरम के अन्य राज्यों में हालत बहुत खराब है। सीमित एटीएम हैं, जिसमें से कैश नहीं निकल रहा है और लोगों को पैसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ गांवों में तो सबसे पास स्थित बैंक भी 50 किलोमीटर दूर है, ऐसे में बैंक आने-जाने में ही पूरा दिन बीत जाता है। गौरतलब है कि 9 नवंबर से 500 और 1000 रुपए के बड़े नोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद से लोगों को पैसों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बिना एटीएम मशीनों के कैलिब्रेशन के बड़े नोट मशीन से नहीं निकल सकते।
