दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर से नकली सिक्कों की टकसाल चलाने वाले एक रैकेट का पर्दाफाश किया है। बीते अक्टूबर महीने से पुलिस ने दिल्ली और हरियाणा में तीन जगह पर रेड डालकर लगभग 12 लाख रुपये से ज्यादा की रकम के नकली सिक्के बदामद किए हैं। नोटबंदी के बाद देश में नकली करेंसी चलाने के लिए जाली सिक्कों को बनाने की कोशिश भी की जा रही है।
पुलिस ने हाल ही में बवाना में एक नकली सिक्कों की टकसाल का भांडाफोड़ा है जहां पर 10 रुपये और 5 रुपये के सिक्के बन रहे थे। टकसाल से 6 हायड्रोलिक और 2 प्रेसिंग मशीनों समेत कुछ डाई के पैकेट भी बरामद किए गए हैं जिनकी मदद से सिक्के बनाए जाते थे। सिक्के इतनी सफाई के साथ बनाए जाते थे कि नकली और असली में पहचान करना भी काफी मुश्किल होता है।
इसी बीच नोटबंदी के बाद लोगों के बीच में 10 रुपये के सिक्कों को लेकर भी काफी सारी अफावाहें फैली हुई हैं। कई लोग 10 रुपये के उन सिक्कों को नहीं ले रहे जिनमें रुपये का निशान नहीं है। यह अफवाह भी इस हद तक बढ़ी कि आरबीआई ने खुद इन्हें खारिज कर जानकारी दी कि बिना किसी परेशानी के 10 रुपये के सिक्के लिए जा सकते हैं।
आरबीआई के मुताबिक कुछ 10 रुपये के सिक्के लंबे समय से जारी किए जा रहे हैं और रुपये का निशान जुलाई 2011 में जारी किया गया था ऐसे में उनके डिजाइन में थोड़ा बहुत फर्क होता है लेकिन जिन सिक्कों पर रुपये का निशान नहीं है जरूरी नहीं कि वह नकली हो।
ऐसे करें फर्क
नकली और असली सिक्कों के बीच फर्क पता लगाना वैसे तो काफी मुश्किल है लेकिन कुछ कमियों से आसानी से पहचाना जा सकता है। कोई भी टकसाल नकली सिक्कों की एकदम बारीक नकल नहीं कर सकती। आरबीआई द्वारा बनाए गए सिक्कों की गुणवत्ता को आप आसानी से पहचान सकते हैं। किसी भी नकली सिक्के की पहचान उसके उभार को ध्यान से देखकर की जा सकती है।
10 रुपये का सिक्का अगर नकली होगा तो उस पर बनाए गए कई निशान जैसे रुपये का निशान, रुपये की संख्या और सिक्के पर उभारे गए पूरे डिजाइन की मोटाई बहुत ज्यादा दिखेगी या मेहसूस होगी। इसके अलावा सिक्के के बाहरी किनारे का उभार भी नकली सिक्के में काफी ज्यादा दिखेगा। इन बारीकियों पर ध्यान देकर आप नकली और असली सिक्कों में फर्क कर सकते हैं।
