CJI DY Chandrachud: सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सबरीमाला मंदिर मामले में दिए गए अपने फैसले को सही ठहराया है। बता दें कि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया था कि किसी भी उम्र की महिलाएं केरल के सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर में जा सकती हैं। यह फैसला सुनाने वाली कॉन्स्टीट्यूशन बेंच में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, तत्कालीन जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा शामिल थीं। कॉन्स्टीट्यूशन बेंच ने 4-1 के बहुमत से अपना फैसला सुनाया था।

जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने बाकी चार जजों के फैसले से असहमति जताई थी।

सीजेआई चंद्रचूड़ ने अपने फैसले के बचाव में कहा कि केरल के सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म वाली महिलाओं को प्रवेश करने से रोकना भारतीय संविधान के आर्टिकल 17 के तहत प्रतिबंधित किए गए अनटचेबिलिटी यानी छुआछूत के अंतर्गत आता है।

सीजेआई ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माताओं ने आर्टिकल 17 के तहत छुआछूत की परिभाषा को किसी एक सामाजिक बुराई तक सीमित नहीं रखा था और ऐसा उन्होंने बहुत सोच-समझकर किया था।

सीजेआई ने कहा कि उन्होंने जब संविधान सभा में हुई बहसों को पढ़ा तो यह निष्कर्ष निकाला कि संविधान के निर्माताओं ने छुआछूत को जाति से नहीं जोड़ा था। सीजेआई गुरुवार को नई दिल्ली में एमके नांबियार स्मारक में अपनी बात कह रहे थे। नांबियार सीनियर एडवोकेट और पूर्व अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल के पिता हैं।

तब चंद्रचूड़ ने क्या कहा था फैसले में?

2018 में भी चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा था कि धर्म महिलाओं को पूजा के अधिकार से वंचित रखने की वजह नहीं हो सकता। महिलाओं के बारे में ऐसा मानना कि वे भगवान की कम संतान हैं ऐसा कहना संवैधानिक नैतिकता से आंखें बंद कर लेने जैसा है। तब चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा था कि महिलाएं व्रत नहीं रख सकतीं, यह उनके खिलाफ कलंक की तरह है।

जबकि इस फैसले से असहमति रखने वालीं जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा था कि सबरीमाला मंदिर में उठाए गए मुद्दों का असर अन्य धर्मस्थलों पर भी पड़ेगा।

अपने संबोधन के दौरान सीजेआई ने संविधान की संकीर्ण व्याख्या का विरोध किया। सीजेआई ने कहा कि जैसे-जैसे समाज विकसित होता है वैसे-वैसे संवैधानिक सिद्धांतों का भी विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सिर्फ कोई शब्दों का पाठ नहीं है बल्कि इससे कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा कि संविधान हमारी लोकतांत्रिक संस्कृति की बुनियाद है और संविधान का मतलब कभी भी सामाजिक और कानूनी मामलों पर नियंत्रण रखने से नहीं था।

अय्यप्पा स्वामी की होती है पूजा

सुप्रीम कोर्ट ने जब केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने और पूजा करने की इजाजत दी थी तो इसे लेकर काफी विवाद हुआ था। उससे पहले इस मंदिर में 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। सबरीमाला मंदिर में अय्यप्पा स्वामी की पूजा होती है। अय्यप्पा स्वामी को ब्रह्मचारी माना गया है, ऐसे में इस मंदिर में मासिक धर्म वाली महिलाओं को प्रवेश की इजाजत नहीं थी। यह मंदिर काफी पुराना है।