केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जल्द ही शादीशुदा महिलाओं के अलावा कुंवारी महिलाओं को भी अनचाहे गर्भ से बचने के लिए गर्भपात कराने की इजाजत दे सकती है। वर्तमान कानून के मुताबिक सिर्फ उन्हीं महिलाओं को अनचाहे गर्भ को टर्मिनेट करवाने की अनुमति है, जो शादीशुदा हैं। वहीं मौजूदा कानून के अनुसार गर्भपात के लिए एक डॉक्टर की भी आवश्यकता होती है, जो जानकारी देते हैं कि क्यों अबॉर्शन होना जरूरी है या नहीं। नया कानून स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ऐक्ट में संशोधन के लिए की गई सिफारिशों का नतीजा होगा।
देशभर में सेक्शुअली ऐक्टिव सिंगल व अनमैरिड विमिन को देखते हुए सरकार ने गर्भपात के कानूनी दायरे को बढ़ाने का विचार कर रही है। वहीं एक्सपर्ट्स की राय है कि यह एक प्रगतिशील कदम होगा और महिलाओं को गर्भपात के सुरक्षित और कानूनी विकल्प मुहैया करएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जिसके तहत ‘गर्भ निरोधक गोलियों के असफल रहने’ व ‘अनचाहे गर्भ’ जैसे विकल्पों को अबॉर्शन के लिए कानूनी मान्यता मिल सकेगी।
इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी सिफारिशों में यह भी कहा है कि सामान्य गर्भपात की ट्रेनिंग होम्यॉपैथ्स और नर्सों को भी दी जानी चाहिए। एक अधिकारी के मुताबिक अमेंडमेंट बिल संसद से पास होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय इससे जुड़े नियमों को सिलसिलेवार तरीके से सामने रखेगा। वहीं ‘आईपीएएस’ एनजीओ के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर विनोज कहा कि ‘यह संशोधन महिलाओं को सुरक्षित अबॉर्शन की सहूलियत देगा। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीद है कि जल्द से जल्द इस बिल को संसद से पास करवा लिया जाएगा।

