गृह मंत्रालय ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPFs) और राज्य पुलिस के अधिकारियों को साल में कम से कम पचास रातें सीमावर्ती गांवों में बिताने का निर्देश दिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में इसकी वजह सीमा पर रहने वाले लोगों से मेलजोल बढ़ाने और जमीनी स्तर पर खुफिया जानकारी जमा करने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने को बताया गया है।

रिपोर्ट में इस मामले से अवगत अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ये निर्देश बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF), भारत तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB), असम राइफल्स के डायरेक्टर जनरल और सीमावर्ती राज्यों के पुलिस प्रमुखों को जारी किए गए थे। यह निर्देश पिछले साल नवंबर में रायपुर में हुई DG-IG कॉन्फ्रेंस में हुई चर्चाओं के बाद जारी किया गया है।

हाल ही में एक निर्देश में, गृह मंत्रालय ने कहा कि पुलिस को वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (VVP) के तहत सीमावर्ती गांवों में अपनी गतिविधि बढ़ानी चाहिए। सूत्रों ने निर्देशों का हवाला देते हुए कहा, “सीधे उपायों के तहत, पुलिस अधिकारियों/टीमों को हर साल कम से कम 50 रातों के लिए सीमावर्ती गांवों में रुकना चाहिए।”

क्या है वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का मकसद?

वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम 10 अप्रैल 2023 को गृह मंत्रालय द्वारा उत्तरी सीमा से सटे ब्लॉकों में रणनीतिक महत्व वाले गांवों की पहचान करने और इन गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के मिशन मोड में लॉन्च किया गया था।

एक सूत्र ने बताया कि अपनी 50 दिन की यात्रा के दौरान अधिकारी सीधे ग्रामीणों से बात करेंगे ताकि उनकी बुनियादी सामाजिक-आर्थिक समस्याओं, परंपराओं, संभावित कमजोरियों को समझ सकें, उनका भरोसा जीत सकें और इंटेलिजेंस गैदरिंग को बेहतर बना सकें।

उन्होंने कहा, “इन लंबी यात्राओं के दौरान अधिकारियों से यह भी उम्मीद की जाती है कि वे युवाओं, एडवेंचर टूरिस्ट, NCC कैडेट्स और समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत करें, और उन्हें सुरक्षा एजेंसियों के लिए ‘आंख और कान’ के तौर पर काम करने के लिए प्रोत्साहित करें।”

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