यूपी के बुलंदशहर में 29 जुलाई की रात को महिला और उसकी बेटी को कार से घसीटकर ले जाया गया और फिर उनके साथ गैंगरेप किया गया। यही नहीं घायल जब सरकारी अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद महिला डॉक्टर ने भी उनकी बात का विश्वास नहीं किया। इस घटना ने पूरे राज्य की लॉ एंड ऑर्डर की पोल खोलकर रख दी है। बता दें कि इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पीड़ितों के मुताबिक हमलावरों की संख्या 7-8 थी।
35 साल की रेप सरवाइवर ने NDTV से बातचीत में कहा, ‘हमारे पूरे शरीर में चोट के निशान थे, मेरी बेटी के ब्लीडिंग (खून बह रहा था) हो रही थी लेकिन डॉक्टर ने हमारा विश्वास नहीं किया। उनका कहना था कि हम उसकी (बेटी) कंडीशन को लेकर झूठ बोले रहे हैं। महिला ने बताया कि डॉक्टर ने पीड़ित किशोरी को चुपचाप एक कोने में बैठने के लिए कहा।’ पीड़िता के देवर ने बताया कि उसे (महिला) बुरी तरह से आघात पहुंचा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह डॉक्टर के इस तरह के व्यवहार पर क्या प्रतिक्रिया दे। उन्होंने बताया कि उत्पीड़न के बाद उन्हें पुलिस की ओर से भी कोई मदद नहीं मिली।
कैब ड्राइवर (जिसकी बेटी और पत्नी पर हमला किया गया) ने बताया कि उसने 100 नंबर पर पुलिस को कई बार फोन किया लेकिन उनका फोन या तो बिजी आया और या फिर नो रिस्पॉन्स बताता रहा। कैब ड्राइवर के भाई ने बताया कि उन्हें पुलिस को टीम भेजने के घंटों मनाना पड़ा। जब वह आ गए तो हमें केस दर्ज करने के लिए पुलिस से मिन्नतें करनी पड़ी, वह हमारी बात का भरोसा नहीं कर रहे थे।
गौरतलब है कि महिला और उसकी बेटी 29 जुलाई की रात अपने परिवार के साथ शाहजहांपुर से आ रही थीं। बुलंदशहर में एंट्री करते ही किसी ने उनकी कार को लोहे की रॉड से चोट किया। जैसे ही चालक ने गाड़ी रोकी, वैसे ही बंदूक की नोक पर बदमाशों ने उन्हें बंधक बना लिया। परिवार के साथ लूटपाट की गई । बदमाश 35 साल की महिला और उसकी बेटी को दूर तक घसीटकर ले गए और उनके साथ तीन घंटे तक गैंगरेप किया।

