बोडो समूह द्वारा असम में आदिवासियों की बड़े स्तर पर की गई हत्याओं के संदर्भ में शिवसेना ने आज केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि वह :केंद्र: आज तक इस पूर्वोत्तर राज्य की नाजुक स्थिति को समझ ही नहीं पाया है।
शिवसेना ने यह भी कहा कि असम में कई दशकों से जारी हिंसा का मुद्दा तभी हल होगा, जब जम्मू-कश्मीर और असम में न्याय :सुरक्षा मुद्दों को संभालने: के संदर्भ में कोई अंतर नहीं रह जाएगा।
नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एस) की ओर से किए गए हालिया हत्याकांड और असम में आदिवासियों की ओर से की गई जवाबी हिंसा के कारण मरने वालों की कुल संख्या 78 तक पहुंच गई।
शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में आज कहा गया, ‘‘पिछले कई वर्षों से असम में हिंसा और अवैध घुसपैठ जारी हैं लेकिन दिल्ली में बैठने वाले लोग आज तक वहां की नाजुक स्थिति को समझ नहीं पाए हैं। यह जरूरी है कि हम जम्मू-कश्मीर से ज्यादा महत्व असम को दें।’’
संपादकीय में कहा गया, ‘‘किसी को भी राज्य :असम: में पनप रहे संकटों की कोई चिंता नहीं है और कोई भी वहां हो रहे जनसंहारों से पीड़ा का अनुभव नहीं करता। जिस दिन जम्मू-कश्मीर और असम में न्याय मिलने से जुड़ी असमानताएं खत्म होना शुरू हो जाएंगी, उस दिन असम में समस्याओं पर रोक लग जाएगी।’’
शिवसेना ने कहा कि राजनैतिक दल चुनावी लाभों के लिए बांग्लादेशियों की घुसपैठ की ओर से अपनी आंखें मूंद लेते हैं। इसके कारण असम जैसा महत्वपूर्ण राज्य भारत के हाथों से फिसला जा रहा है।
संपादकीय में आगे कहा गया, ‘‘असम में संघर्ष वर्ष 1971 से जारी हैं। लेकिन कोई भी वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं का हल नहीं ढूंढ सका। सभी के अपने-अपने राजनैतिक स्वार्थ हैं। हर कोई अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के वोट बैंक के दम पर चुनाव जीत लेना चाहता है। यह हैरानी की बात है कि किसी को भी इसका कोई पछतावा नहीं है।’’
