नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष के हमलों में घिरी नरेंद्र मोदी सरकरा को अब पार्टी के अंदर भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने अपने ताजा बयान में कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार का फैसला “अच्छी तरह सोचा-समझा” नहीं था। हालांकि शौरी साथ ही ये भी कहा कि इस फैसले की मंशाल भली हो सकती है। शौरी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय विनिवेश मंत्री रहे थे। शौरी ने निजी टीवी चैनल एनडीटीवी से कहा, “इसका मकसद कालाधन खत्म करना बताया गया है तो इसलिए हर कोई कहेगा कि बहुत अच्छा। लेकिन मुझे नहीं लगता कि ये स्ट्राइक (हमला) अच्छी तरह सोच-समझकर की गई है। ये स्ट्राइक कालेधन पर नहीं है। ये स्ट्राइक भारत में नोटों के कानूनी चलन पर है। ये नकद लेन-देन पर स्ट्राइक है।”

अरुण शौरी ने कहा, “जिन लोगों को पास कालाधन या काली संपत्ति है वो उसे नकद के तौर पर नहीं रखते। भारत के एक प्रतिशत लोगों के पास देश की 53 प्रतिशत संपत्ति है। 10 प्रतिशत लोगों के पास देश की 85 प्रतिशत संपत्ति है। अब इन अमीर लोगों के पास कालाधन और बढ़ जाएगा। वो गद्दों के नीचे कालाधन नहीं छिपाने जा रहे।” शौरी के अनुसार नोटबंदी के फैसले से गरीब नागरिकों का जीवन प्रभावित हुआ था जिनका रोज का जीवन नकद लेन-देन पर टिका होता है। शौरी के अनुसार कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को टैक्स नीति में बदलाव जैसे कदम उठाने चाहिए थे।

शौरी ने नोटबंदी को सरकार का साहसी कदम बताए जाने पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, “कुएं में कूदने को भी साहस कहा जा सकात है। आत्महत्या भी साहसिक काम है।” शौरी मोदी सरकार के कई पुराने फैसलों की आलोचना कर चुक हैं। शौरी ने कहा कि वो नकद-मुक्त अर्थव्यवस्था के  समर्थक हैं लेकिन उन्हें नहीं लगता कि नोटबंदी उस दिशा में उठाया गया कदम है।