राजस्थान के कोटा में कुछ ही घंटों के अंतराल में एक के बाद एक 9 नवजातों की मौत का मामला सामने आया है। अधिकारियों ने बताया है कि सरकारी जेके लोन अस्पताल में बुधवार रात को ही पांच बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि चार और की गुरुवार को जान चली गई। बता दें कि इसी अस्पताल में पिछले साल भी अचानक से बड़ी संख्या में बच्चों की मौत का मामला सामने आया था, जिसके बाद देशभर में राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो गए थे।

अफसरों के मुताबिक, जिन बच्चों की जान गई है, उनकी उम्र 1 दिन से लेकर 4 साल के बीच थी। बच्चों की मौत के बाद कलेक्टर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों की देखरेख के लिए तत्काल 5 अतिरिक्त डॉक्टर और 10 नर्सिंग स्टाफ तैनात करने के आदेश दिए। उधर, राज्य के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने जांच बिठा दी है और पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। इस बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने भी जांच की मांग की है।

बता दें कि जेके लोन अस्पताल में पिछले साल इसी तरह मासूमों की जान गई थी। नवंबर-दिसंबर 2019 में 35 दिन के अंदर ही 107 बच्चों की मौत हो गई थी। तब मामले ने काफी तूल पकड़ा था। इसको लेकर गहलोत सरकार की काफी आलोचना हुई थी। इस बार भी स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के आदेश देने के साथ एक्सपर्ट कमेटी से 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है।

 

इस बार अचानक कई नवजातों की मौत के बाद अस्पताल ने फिर बयान के जरिए मामले में टाल-मटोल शुरू कर दी है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एससी दुलारा ने कहा- 9 नवजात में से 3 जब अस्पताल पहुंचे तो उनकी जान जा चुकी थी। 3 को जन्मजात बीमारी थी। दो बच्चे बूंदी से रेफर होकर आए हैं, उन्हें इन्फेक्शन था। डॉ. दुलारा ने कहा कि अस्पताल में हर महीने करीब 60 से 100 बच्चों की मौत होती है। रोज के लिहाज से ये आंकड़ा 2 से 5 के बीच रहता है। हालांकि, एक दिन में 9 बच्चों की मौत सामान्य नहीं है।