समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। साल 1967 में पहली बार जसवंत नगर से विधायक बनने के बाद भी मुलायम के लिए राजनीति की राह आसान नहीं थी। उन्हें कई चुनौतियों से होकर गुजरना पड़ा। मुलायम को पहला चुनाव लड़वाने में उनके राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह की अहम भूमिका थी। नत्थू सिंह उन दिनों जसवंत नगर के विधायक हुआ करते थे। उनकी पहली बार एक कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान मुलायम से मुलाकात हुई थी और उनके कायल हो गए थे।

अखिलेश यादव की बायोग्राफी ‘विंड्स ऑफ चेंज’ में वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन लिखती हैं, ‘साल 1962 में मैनपुरी में एक 3 दिवसीय कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। 23 साल के नौजवान मुलायम सिंह यादव भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे। उसी साल हो रहे विधानसभा चुनाव में जसवंत नगर से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार नत्थू सिंह भी इस प्रतियोगिता में पहुंचे थे। वे मुलायम के प्रदर्शन से बेहद प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने जसवंत नगर की सीट अगले विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव को दे दी।

मुलायम के राजनीतिक गुरु पर पुलिस कार्रवाई: मुलायम ने भी अपने राजनीतिक गुरु नत्थू सिंह के सम्मान में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसका उदाहरण एक घटना से मिलता। मुलायम के भाई राम गोपाल यादव बताते हैं कि एक बार जब सियासी रंजिशन नत्थू सिंह के घर पुलिस का छापा पड़ा तो किस तरह मुलायम ने लोहा लिया था।

दरअसल, नवंबर 1963 में इटावा के एसपी बीपी सिंघल ने नत्थू सिंह को अपराधी घोषित कर दिया और उनके घर छापेमारी की। बीपी सिंघल विश्व हिंदू परिषद के नेता रहे अशोक सिंघल के भाई थे। कहा गया कि सिंघल ने जान बूझकर नत्थू सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला। इस घटना के बाद मुलायम सिंह समेत तमाम समाजवादी नेता खफा हो गए।

इसके बाद तत्कालीन राज्यसभा सांसद चंद्रशेखर ने इस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान कर दिया।क्षेत्रीय स्तर पर मुलायम के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन आयोजित किया गया। इस आंदोलन से इटावा के तत्कालीन डीएम गुलाम हुसैन भी दहल गए थे।

तत्कालीन अधिकारियों को भी नहीं थी इसकी उम्मीद: बाद में बी.पी सिंघल IG बने और उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया कि उन्हें इस बात की जरा भी उम्मीद नहीं थी कि नत्थू सिंह की गिरफ्तारी को लेकर की जा रही कार्रवाई के खिलाफ इतना बड़ा आंदोलन हो सकता है। राम गोपाल यादव कहते हैं कि यहीं से मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक जीवन की अहम शुरुआत हुई थी।

आपको बता दें समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया से मुलायम की पहली मुलाकात नत्थू सिंह ने ही करवाई थी। उस समय कई नेता नहीं चाहते थे कि मुलायम चुनाव लड़ें क्योंकि उन्हें चुनाव का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन नत्थू सिंह अपनी बात पर अड़े रहे। इस तरह शुरू हुआ था मुलायम का राजनीतिक सफर।