Shaheed Diwas 2020 Quotes, Status, Images, Photos, Shayari, Slogan, Thoughts in Hindi: भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को श्रद्धांजलि देने और इनके बलिदानों को याद करने के लिये भारत में 23 मार्च को भी शहीद दिवस मनाया जाता है। आजादी के लिए ब्रिटिश शासन से भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर ने लोहा लिया था। देश में इसके अलावा, 30 जनवरी को भी शहीद दिवस मनाया जाता है। इस दिन महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जाता है और उनके बलिदानों को याद किया जाता है। शहीद दिवस के मौके पर कई जगह देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम होते हैं। साथ ही साथ, इस दिन लोग अपनों को देशप्रेम से ओत-प्रोत संदेश भी भेजते हैं। ऐसे में आइए बताते हैं इस दिन कौन से संदेश भेजकर आप लोगों को शुभकामनाएं दे सकते हैं।
1. शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा।
– जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’
2. मिटा दिया है वजूद उनका जो भी इनसे भिड़ा है,
देश की रक्षा का संकल्प लिए जो जवान सरहद पर खड़ा है।

3. वतन की मोहब्बत में खुद को तपाये बैठे है,
मरेंगे वतन के लिए शर्त मौत से लगाये बैठे हैं।
देश के शहीदो को नमन।

4. जब देश में थी दिवाली, वो खेल रहे थे होली,
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली।
5. मैं जला हुआ राख नहीं, अमर दीप हूं,
जो मिट गया वतन पर मैं वो शहीद हूं।
भारत माता की जय
6. अपनी आज़ादी को हम हरगिज भुला सकते नहीं,
सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नहीं।
देश के शहीदो को नमन।
7. मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आए,
काश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए,
ना खौफ है मौत का, ना आरजू है जन्नत की,
मगर जब कभी जिक्र हो शहीदों का,
काश मेरा भी नाम आए।
8. जिनकी कुर्बानियों से हम जीवित हैं
याद हमेशा वे हमें आएंगे,
न कभी हम भूल पाएंगे


“सूर्य विश्व में हर किसी देश पर उज्ज्वल हो कर गुजरता है परन्तु उस समय ऐसा कोई देश नहीं होगा जो भारत देश के सामान इतना स्वतंत्र, इतना खुशहाल, इतना प्यारा हो।”
~ भगत सिंह
मैं जला हुआ राख नहीं, अमर दीप हूँ
जो मिट गया वतन पर मैं वो शहीद हूँ
मिटा दिया है वजूद उनका जो भी इनसे भिड़ा है
देश की रक्षा का संकल्प लिए जो जवान सरहद पर खड़ा है
उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता
जिस मुल्क की सरहद की निगहबान हैं आँखें
– अज्ञात
भारत को आजादी दिलाने में अनगिनत क्रांतिकारियों का नाम याद किया जाता है लेकिन जब भी देशप्रेम की बात की जाती है, उन क्रांतिकारियों में सबसे पहले 23 मार्च 1931 को शहीद हुए भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु का नाम सबसे पहले जेहन में आता है।
रौशन है कामयाब है छब्बीस जनवरी
खिलता हुआ गुलाब है छब्बीस जनवरी
– शौकत परदेसी
दुख में सुख में हर हालत में भारत दिल का सहारा है
भारत प्यारा देश हमारा सब देशों से प्यारा है
– अफ़सर मेरठी
दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो
निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो
– जाफ़र मलीहाबादी
लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी
– फ़िराक़ गोरखपुरी
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
– लाल चन्द फ़लक
हलकी सी धुप बरसात के बाद,
थोरी सी खशी हर बात के बाद,
इसी तरह मुबारक हो आप को,
आजादी 1 दिन के बाद।
Shaheed Diwas
1. चूमा था वीरों ने फांसी का फंदा,
यूँ ही नहीं मिली थी आजादी खैरात में।।
2. चैन ओ अमन का देश है मेरा, इस देश में दंगा रहने दो,
लाल हरे में मत बांटो, इसे शान ए तिरंगा रहने दो।
मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए,
बस अमन से भरा यह वतन चाहिए।
जब तक जिंदा रहूं, इस मातृभूमि के लिए,
और जब मरूं तो तिरंगे का कफन चाहिए।
भारत के गणतंत्र का सारे जग में है मान,
दशकों से खिल रही भारत की अद्भुत शान,
सब धर्मों को देकर मान, रच गया इतिहास,
इसलिए हर देशवासियों को इसमें है विश्वास
देश की हिफाजत मरते दम तक करेंगे,
दुश्मन की हर गोली का हम सामना करेंगे,
आजाद हैं और आजाद ही रहेंगे।
जय हिन्द !!
लड़े जंग वीरों की तरह,
जब खून खौल फौलाद हुआ।
मरते दम तक डटे रहे वो,
तब ही तो देश आजाद हुआ।
वतन की मोहब्बत में खुद को तपाये बैठे है,
मरेंगे वतन के लिए शर्त मौत से लगाये बैठे हैं।
देश के शहीदो को नमन।
जब देश में थी दिवाली, वो खेल रहे थे होली,
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली।
कहां वे वीर, कहां वे शौर्य गाथाएं हैं, जिन्हें हमने सुना है और क्रांतिवीरों ने दिखाएं हैं। सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की वीरता को हर कोई नमन करेगा। यह मेसेज सभी को दें।
शहीदों की चिताओं से मिलती है प्रेरणा, करते हैं लोग चर्चा कुर्बान हो जाने की, धूल उनके चरणों की जब भी मिलेगी, बातें करेंगे लोग उसको माथे पर लगाने की। कुछ ऐसे भाव होते हैं शहीदों के लिए सबके मन में, जिसे वे व्यक्त करना चाहते हैं।
आजादी की लड़ाई में दमखम दिखाकर अंग्रेजी फिरंगी सरकार को परेशान करने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु आज भी लाखों युवाओं के आदर्श हैं। ऐसे क्रांतिवीरों को दुनिया हमेशा सलाम करती है। देश के लिए अपनी जान की परवाह न करने वाले इन वीरों को हमारा नमन है।
जिससे मेरा आन-बान है, जिससे मेरी जिंदगी, उसको मेरी सलामी है, उसकी ही हम करें बंदगी
दे सलामी इस तिरंगे को,
जिस से तेरी शान हैं,
सिर हमेशा ऊँचा रखना इसका,
जब तक दिल में जान हैं।।
Shaheed Diwas
मिटा दिया है वजूद उनका जो भी इनसे भिड़ा है,
देश की रक्षा का संकल्प लिए जो जवान सरहद पर खड़ा है।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है !!
आओ झुक कर सलाम करे उनको,
जिनके हिस्से मे ये मुकाम आता है,
खुशनसीब होता है वो खून,
जो देश के काम आता है !!
जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली,
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली।
अपनी आज़ादी को हम हरगिज भुला सकते नहीं,
सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नहीं।
देश के शहीदो को नमन।
23 मार्च 1931 – इस तिथि को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी दी गयी थी।
मेरी जिंदगी में सरहद की कोई शाम आए,
काश मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए,
ना खौफ है मौत का, ना आरजू है जन्नत की,
मगर जब कभी जिक्र हो शहीदों का,
काश मेरा भी नाम आए।