Shaheed Diwas 2020 Quotes, Speech, Essay, Nibandh, Bhashan, Slogan: भारत में शहीद दिवस 2 दिन मनाया जाता है। पहला 30 जनवरी और दूसरी बार 23 मार्च को हम शहीदों की कुर्बानी को याद करते हैं। 23 मार्च को भारत की तीनों असाधारण स्वतंत्रता सेनानियों- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदानों को याद किया जाता है। हमारे देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन तीनों नायकों को अंग्रेजी हुकूमत ने 23 मार्च को ही फांसी पर लटका दिया गया था। ये तीनों ही भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। शहीद दिवस के मौके पर स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों में वाद-विवाद, भाषण, कविता-पाठ और निबंध प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं शहीद दिवस पर आप किस तरह के निबंध लिख सकते हैं।

ऐसे करें शुरुआत: किसी भी मौके पर जब ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन हो तो हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि सबसे पहले आप वहां मौजूद गणमान्य लोगों का अभिवादन करें और फिर अपना इंट्रोडक्शन दें। उसके बाद अपने विषय के बारे में संक्षिप्त रूप में बताएं। फिर भाषण या कविता शुरू करें। ठीक उसी तरह निबंध लिखने के समय भी आप अपने परिचय से ही शुरुआत करें।

निबंध में ये लिखें: शहीद दिवस भारत में उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिये मनाया जाता है जो भारत की आज़ादी, कल्याण और प्रगति के लिये लड़े और अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। इसे हर वर्ष 30 जनवरी और 23 मार्च को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है। भारत विश्व  के उन 15  देशों में शामिल हैं जहां हर वर्ष अपने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिये शहीद दिवस मनाया जाता है। 30 जनवरी को महात्मा गांधी व अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जाता है जबकि 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह दिन विजयी उत्सव होता है, सैन्य शक्ति नवीनतम हथियार उपलब्धि और विज्ञापन का प्रदर्शन करते है। साथ ही साथ, शहीदों को सम्मान देने के लिये अंतर-सेवा टुकड़ी और सैन्य बलों के जवानों द्वारा एक सम्मानीय सलामी दी जाती है।

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10:02 (IST)23 Mar 2020
शहीद दिवस के लिए बेहतरीन स्पीच

भारत को आजादी दिलाने में अनगिनत क्रांतिकारियों का नाम याद किया जाता है लेकिन जब भी देशप्रेम की बात की जाती है, उन क्रांतिकारियों में सबसे पहले 23 मार्च 1931 को शहीद हुए भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु का नाम सबसे पहले जेहन में आता है।आज का दिन इन तीन क्रांतिकारियों को शहीद दिवस के रूप में समर्पित किया जाता है।

09:39 (IST)23 Mar 2020
Shaheed Diwas: इस दिन फांसी पर हंसते हुए झूल गए थे तीन क्रांतिकारी

23 मार्च 1931 को भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसी दिन को हम शहीद दिवस के रूप में मनाते है। इस दिन ही शहीद दिवस मनाया जाता है और भगत सिंह समेत सुखदेव और राजगुरु को याद किया जाता है। अंग्रेजों के बढ़ते हुए अत्याचार से सबसे पहले भगत सिंह ने लौहार में सांडर्स की गोली मार कर हत्या कर दी। उसके बाद ‘पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल’ के विरोध में भगत सिंह ने सेंट्रल असेम्बली में बम फेंका था। हालांकि, उनका मकसद सिर्फ अंग्रेजों तक अपनी आवाज पहुंचाना था कि किसी की हत्याल करना नहीं। इस घटना के बाद उन्हें  गिरफ्तार कर लिया गया था। 

09:09 (IST)23 Mar 2020
देशभक्ति की मिलती है प्रेरणा

वतन के लिए त्याग और बलिदान उनके लिए सर्वोपरि रहा। वे कहते थे कि एक सच्चा बलिदानी वही है जो जरुरत पड़ने पर सब कुछ त्याग दे। भगत सिंह स्वयं अपनी निजी जिंदगी से प्रेम करते थे, उनकी भी महत्वाकांक्षाएं थी, सपने थे। लेकिन वतन पर उन्होंने अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के जीवन से हमें देशभक्ति की प्रेरणा मिलती है। साथ में उन महान क्रांतिकारियों के जीवन से हम यह भी सीख सकते हैं कि अगर देश की आन, बान और शान के खिलाफ कोई ताकत खड़ी होती है तो हमें बल के साथ-साथ वैचारिक रूप से भी उसे कुचलने की आवश्यकता है।

08:47 (IST)23 Mar 2020
जीवन का लक्ष्य पता होना चाहिए...

भगत सिंह जीवन के लक्ष्य को महत्व देते थें। उनका मानना था कि हमें अपने जीवन का लक्ष्य पता होना चाहिए। अगर हमें अपने लक्ष्य का पता होगा और हम अपने लक्ष्योन्मुख से कार्य करेंगे तो हमें सफल होने से कोई ताकत नहीं रोक सकती है।

08:27 (IST)23 Mar 2020
भगत सिंह कहा करते थे...

इंकलाब का नारा बुलंद करने वाले भगत सिंह अपने आखिरी समय में भले ही अंग्रेजी हुकूमत की बेड़ियों में जकड़े थे लेकिन उनके विचार आजाद थे, वो कहते थें कि बेहतर जिंदगी सिर्फ अपने तरीकों से जी जा सकती है। यह जिंदगी आपकी है और आपको तय करना है कि आपको जीवन में क्या करना है। भगत सिंह कहा करते थे, मैं एक ऐसा पागल हूं, जो जेल में भी आजाद है और मेरी गर्मी से ही राख का हर एक कण गतिमान है।

08:07 (IST)23 Mar 2020
भगत सिंह के क्रांतिकारी विचार

जब भगत सिंह को फांसी पर चढ़ाया गया उस समय भगत सिंह की उम्र सिर्फ 23 साल थी। लेकिन उनके क्रांतिकारी विचार बहुत व्यापक और आला के दर्जे के थे। न केवल उनके विचारों ने लाखों भारतीय युवाओं को आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित किया, बल्कि आज भी उनके विचार युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं।

07:47 (IST)23 Mar 2020
ऐसे शुरू करें निबंध लिखना

किसी भी मौके पर जब ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन हो तो हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि सबसे पहले आप वहां मौजूद गणमान्य लोगों का अभिवादन करें और फिर अपना इंट्रोडक्शन दें। उसके बाद अपने विषय के बारे में संक्षिप्त रूप में बताएं। फिर भाषण या कविता शुरू करें। ठीक उसी तरह निबंध लिखने के समय भी आप अपने परिचय से ही शुरुआत करें।

07:26 (IST)23 Mar 2020
शहीद दिवस पर जानें शहीद भगत सिंह के बारे में

एक प्रखर देशभक्त और अपने सिद्धांतों से किसी भी कीमत पर समझौता न करने वाले बलिदानी थे। भगतसिंह के जो प्रत्यक्ष योगदान हैं उसके कारण भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष में उनका कद इतना उच्च है, कि उन पर अन्य कोई संदिग्ध विचार धारा थोपना कतई आवश्यक नहीं है। भगतसिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श है।

07:11 (IST)23 Mar 2020
क्यों मनाया जाता है शहीद दिवस

शहीद दिवस भारत में उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिये मनाया जाता है जो भारत की आज़ादी, कल्याण और प्रगति के लिये लड़े और अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। इसे हर वर्ष 30 जनवरी और 23 मार्च को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है। भारत विश्व  के उन 15  देशों में शामिल हैं जहां हर वर्ष अपने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिये शहीद दिवस मनाया जाता है। 30 जनवरी को महात्मा गांधी व अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जाता है जबकि 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह दिन विजयी उत्सव होता है, सैन्य शक्ति नवीनतम हथियार उपलब्धि और विज्ञापन का प्रदर्शन करते है। साथ ही साथ, शहीदों को सम्मान देने के लिये अंतर-सेवा टुकड़ी और सैन्य बलों के जवानों द्वारा एक सम्मानीय सलामी दी जाती है।

04:54 (IST)23 Mar 2020
शहीद दिवस पर लोग गाएंगे क्रांतिवीरों का गाथा

शहीद दिवस पर आज जगह-जगह लोग क्रांतिवीरों की गाथा गाएंगे। सच यह है कि उनकी गाथा से न केवल प्रेरणा मिलती है, बल्कि मन में उनका नमन करने का भाव भी आता है।

03:25 (IST)23 Mar 2020
क्रांति के किस्से सुनकर लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु अंग्रेजी सत्ता की चूलें हिला दी थीं। उनकी क्रांति के किस्से सुनकर लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। तीनों महान क्रांतिकारियों ने राष्ट्र की रक्षा के लिए कुर्बानी दे दी। उनको पूरा देश याद करता है।

02:03 (IST)23 Mar 2020
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। उनकी कुर्बानी को हमेशा याद किया जाएगा। जब-जब देश की रक्षा और संप्रभुता को शिखर पर पहुंचाने वालों की चर्चा होगी, तब-तब ये वीर शहीद हमें याद आएंगे। इतिहास में उनका नाम हमेशा-हमेशा स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा।

00:15 (IST)23 Mar 2020
भगत सिंह: 8 वर्ष की उम्र में देश के बार में सोचने लगे और 15 की उम्र में घर छोड़ दिए

भगत सिंह क्रांतिकारियों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उनके बारे में बताया जाता है कि वह 8 वर्ष की छोटी उम्र में ही भारत की आजादी के बारे में सोचने लगे थे और 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़ दिया थाl इसके बाद वह भारत को आजाद दिलाने के काम में जुट गए।

22:00 (IST)22 Mar 2020
Shaheed Diwas 2020 Essay: शहीदों को नमन

वो लोग जो वाकई इतिहास बनाते हैं वो शहीद होते हैं। शहीदों का खून चर्च का बीज है। इंसान कभी अपना ईश्वरदूत नहीं स्वीकार करता है और उन्हें प्रभावित करता है लेकिन वो अपने शहीदों से प्यार करते हैं और उनकी पूजा करते हैं जिनके लिये उन्हें प्रताड़ित कर मार दिया जाता है। “वो धरती पर शहीदों के रुप में नहीं भेजे जाते; उन्हें बाहर आके चाहत करनी पड़ेगी। ये आपके संस्कृति पर निर्भर करता है जहाँ आप कार्य कर रहे हैं, जहाँ आप रहते हैं। सभी व्यक्तियों की परिस्थितियाँ अलग होती है”। ये कहना सच होगा कि शहीद के भरोसा उत्पन्न करने से ज्यादा भरोसा उत्पन्न करता है शहीदों को।

21:32 (IST)22 Mar 2020
Shaheed Diwas 2020: शहीद दिवस के लिए स्पीच

23 मार्च यानि, देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्यौछावर करने वाले तीन वीर सपूतों का शहीद दिवस। यह दिवस न केवल देश के प्रति सम्मान और हिंदुस्तानी होने वा गौरव का अनुभव कराता है, बल्कि वीर सपूतों के बलिदान को भीगे मन से श्रृद्धांजलि देता है। उन अमर क्रांतिकारियों के बारे में आम मनुष्य की वैचारिक टिप्पणी का कोई अर्थ नहीं है। उनके उज्ज्वल चरित्रों को बस याद किया जा सकता है कि ऐसे मानव भी इस दुनिया में हुए हैं, जिनके आचरण किंवदंति हैं। भगतसिंह ने अपने अति संक्षिप्त जीवन में वैचारिक क्रांति की जो मशाल जलाई, उनके बाद अब किसी के लिए संभव न होगी।

20:58 (IST)22 Mar 2020
शहीद दिवस के मौके पर यहां से तैयार करें स्पीच

भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए समय समय पर भारत के सपूतों ने अनेक बलिदान दिए । उन्ही बलिदानों में से एक है भगत सिंह ,सुखदेव ,और राजगुरु का बलिदान जिसे हम कभी नही भूलते । उन्होंने हमारे देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अनेक संघर्ष किये ,और देश की खातिर हँसते हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गए । 23 मार्च 1931 को भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु को फाँसी की सजा सुनाई गई । इसी दिन को हम शहीद दिवस के रूप में मनाते है । शहीद दिवस वैसे तो कई दिनों में मनाया जाता हैं । परंतु लोगो के बीच मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय तिथि जो मानी जाती है वह 23 मार्च 1931 को । इस दिन ही शहीद दिवस मनाया जाता है ।

20:29 (IST)22 Mar 2020
Shaheed Diwas 2020:शहीद दिवस पर लेख, यहां से करें तैयार

भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को श्रद्धांजलि देने और इनके बलिदानों को याद करने के लिये भारत में 23 मार्च को भी शहीद दिवस मनाया जाता है। आजादी के लिये ब्रिटिश शासन से भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर ने लोहा लिया था। सिक्ख परिवार में पंजाब के लायलपुर में 28 सितंबर 1907 को जन्में भगत सिंह भारतीय इतिहास के महान स्वतंत्रता सेनानियों में जाने जाते थे। इनके पिता गदर पार्टी के नाम से प्रसिद्ध एक संगठन के सदस्य थे जो भारत की आजादी के लिये काम करती थी। भगत सिंह ने अपने साथियों राजगुरु, आजाद, सुखदेव, और जय गोपाल के साथ मिलकर लाला लाजपत राय पर लाठी चार्ज के खिलाफ लड़ाई की थी। शहीद भगत सिंह का साहसिक कार्य आज के युवाओं के लिये एक प्रेरणास्रोत का कार्य कर रहा है।

19:51 (IST)22 Mar 2020
Shaheed Diwas 2020: शहीद दिवस के लिए ट्रेंडिंग निबंध

23 मार्च, 1931 की मध्यरात्रि को अंग्रेज़ी हुकूमत ने भारत के तीन सपूतों भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी पर लटका दिया था। इन तीनों वीरों की शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए ही शहीद दिवस मनाया जाता है। महात्मा गाँधी की याद में भी शहीद दिवस मनाया जाता है।

19:24 (IST)22 Mar 2020
Shaheed Diwas 2020 Speech: शहीद दिवस पर यहां से तैयार करें निबंध

शिवराम राजगुरु, भगत सिंह और सुखदेव थापर को श्रद्धांजलि देने के लिये और इनके बलिदानों को याद करने के लिये भारत में 23 मार्च को भी हम शहीद दिवस मनाते है। पंजाब हर साल शहीद दिवस अपने नायकों- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद मनाता है। पंजाब के गांव के संबंध में, उनकी शहीदता ने भारत की स्वतंत्रता आंदोलनों के दौरान नया क्षितिज स्थापित किया था। तीनों ने हिंसक ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी हासिल करने के लिए अपने जीवन का त्याग कर किया।

18:48 (IST)22 Mar 2020
आजादी के दीवाने

यह एक संयोग ही था कि जब उन्हें फांसी दी गई और उन्होंने संसार से विदा ली,उस वक्त उनकी उम्र 23 वर्ष 5 माह और 23 दिन थी और दिन भी था 23 मार्च। अपने फांसी से पहले भगत सिंह ने अंग्रेज सरकार को एक पत्र भी लिखा था,जिसमें कहा था कि उन्हें अंग्रेजी सरकार के खिलाफ भारतीयों के युद्ध का प्रतीक एक युद्धबंदी समझा जाए तथा फांसी देने के बजाए गोली से उड़ा दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। देश भर में भगत सिंह को आजादी के दीवाने के रूप में देखती है जिसने अपनी जवानी सहित सारी जिंदगी देश के लिए समर्पित कर दी।

18:29 (IST)22 Mar 2020
भगत सिंह के अनमोल विचार

1. चीजें जैसी हैं, आम तौर पर लोग उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं।

हमें इसी निष्क्रियता को क्रांतिकारी भावना से बदलने की जरूरत है।

2. जो भी विकास के लिए खड़ा है उसे हर रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी,

उसमें अविश्वास करना होगा और उसे चुनौती देनी होगी।

18:09 (IST)22 Mar 2020
ये है 23 मार्च का इतिहास


भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज अधिकारी जेपी सांडर्स को मारा। इस कार्रवाई में क्रां‍तिकारी चन्द्रशेखर आजाद ने भी उनकी पूरी सहायता की। इसके बाद भगत सिंह ने अपने क्रांतिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर अलीपुर रोड़ दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेंट्रल असेम्बली के सभागार में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज सरकार को जगाने के लिए बम और पर्चे फेंके। बम फेंकने के बाद वहीं पर उन दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी। इसके बाद 'लाहौर षडयंत्र' के इस मुकदमें में भगतसिंह को और उनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव को 23 मार्च, 1931 को एक साथ फांसी पर लटका दिया गया। यह माना जाता है कि मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह ही तय थी, लेकिन लोगों के भय से डरी सरकार ने 23-24 मार्च की मध्यरात्रि ही इन वीरों की जीवनलीला समाप्त कर दी और रात के अंधेरे में ही सतलज के किनारे उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया।

17:49 (IST)22 Mar 2020
निबंध की शुरुआत या अंत को बनाए ऐसे इंप्रेसिव

अपने निबंध से निर्णायक गणों को मोहने के लिए जरूरी है कि उसमें आप कुछ खास बातें जोड़ें जिससे आपका निबंध बाकियों की तुलना में खास और अलग हो। इसके लिए आप अपने विषय पर कुछ देर रिसर्च करें। साथ ही, अपने निबंध के शुरुआत या अंत में कुछ कोट्स को जरूर शामिल करें। जैसे कि-

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,

वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा। 

17:28 (IST)22 Mar 2020
भगत सिंह थे इससे प्रभावित

अमृतसर में 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह की सोच पर इतना गहरा प्रभाव डाला कि लाहौर के नेशनल कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की। काकोरी कांड में रामप्रसाद 'बिस्मिल' सहित 4 क्रांतिकारियों को फांसी व 16 अन्य को कारावास की सजा से भगत सिंह इतने ज्यादा बेचैन हुए कि चन्द्रशेखर आजाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़ गए और उसे एक नया नाम दिया'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन'। इस संगठन का उद्देश्य सेवा,त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक तैयार करना था।

17:13 (IST)22 Mar 2020
बेहद साहसी थे भगत सिंह

भगतसिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह युवकों के लिए हमेशा ही एक बहुत बड़ा आदर्श बना रहेगा। भगतसिंह को हिन्दी, उर्दू, पंजाबी तथा अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी जो उन्होंने बटुकेश्वर दत्त से सीखी थी। जेल के दिनों में उनके लिखे खतों व लेखों से उनके विचारों का अंदाजा लगता है। उन्होंने भारतीय समाज में भाषा,जाति और धर्म के कारण आई दूरियों पर दुख व्यक्त किया था।

17:13 (IST)22 Mar 2020
बेहद साहसी थे भगत सिंह

भगतसिंह ने देश की आजादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, वह युवकों के लिए हमेशा ही एक बहुत बड़ा आदर्श बना रहेगा। भगतसिंह को हिन्दी, उर्दू, पंजाबी तथा अंग्रेजी के अलावा बांग्ला भी आती थी जो उन्होंने बटुकेश्वर दत्त से सीखी थी। जेल के दिनों में उनके लिखे खतों व लेखों से उनके विचारों का अंदाजा लगता है। उन्होंने भारतीय समाज में भाषा,जाति और धर्म के कारण आई दूरियों पर दुख व्यक्त किया था।

16:22 (IST)22 Mar 2020
क्या है भगत सिंह की कहानी

शहीद दिवस के दिन भगतसिंह, राजगुरू और सुखदेव के अदम्य साहस और बलिदान को याद किया जाता है। इतनी कम उम्र में इन तीनों में ही राष्ट्रप्रेम का ऐसा सैलाब उमड़ा था कि अपने जान की परवाह किए बगैर ये देश के लिए फांसी पर चढ़ गएं।

भगतसिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को पंजाब के जिला लायलपुर में बंगा गांव (जो अभी पाकिस्तान में है) के एक देशभक्त सिख परिवार में हुआ था, जिसका अनुकूल प्रभाव उन पर पड़ा था। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। यह एक सिख परिवार था जिसने आर्य समाज के विचार को अपना लिया था। उनके परिवार पर आर्य समाज व महर्षि दयानन्द की विचारधारा का गहरा प्रभाव था। भगत सिंह के जन्म के समय उनके पिता 'सरदार किशन सिंह' एवं उनके दो चाचा 'अजीतसिंह' तथा 'स्वर्णसिंह' अंग्रेजों के खिलाफ होने के कारण जेल में बंद थे।