अदालत की अवमानना से जुड़े एक मामले में सख्त कदम उठाते हुए त्रिपुरा हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महिला को अदालत की कार्यवाही खत्म होने तक कोर्ट रूम में खड़े रहने का आदेश दिया। जस्टिस टी अमरनाथ गौड़ और बिस्वजीत पालित की पीठ ने तलाक समझौते की शर्तों का पालन न करने के लिए एक महिला के खिलाफ अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान यह दंड सुनाया।
महिला ने आदेश पारित करने वाले न्यायाधीशों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए थे। इस मामले में एक्शन लेते हुए हाई कोर्ट ने कहा, “यह न्यायालय ऐसे आचरण का गंभीर संज्ञान लेता है और दोहराता है कि अगर कोई वादी किसी आदेश से असंतुष्ट है तो कानूनी उपाय हमेशा उपलब्ध हैं।” अदालत ने आगे कहा कि मीडिया को संबोधित करना और प्रेस बयान जारी करना ऐसा उपाय नहीं है जिसे यह अदालत स्वीकार कर सके। पीठ ने फैसला सुनाया, “दंड के तौर पर, यह न्यायालय निर्देश देता है कि वह अदालत के स्थगित होने तक न्यायालय में खड़ी रहे। एक महिला होने के नाते उसकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए और नरमी बरतते हुए यह दंड दिया जाता है।”
महिला ने तलाक के फैसले की शर्तों और नियमों का पालन नहीं किया
यह मामला साल 2023 के तलाक समझौते से जुड़ा है, जिसके तहत पत्नी ने अदालत को यह वचन दिया था कि वह गिफ्ट के तौर पर अपनी दो बेटियों को कई संपत्तियां ट्रांसफर करेगी। इसके बदले में पति ने उसके लिए एक नया फ्लैट खरीदने और मासिक भरण-पोषण भत्ता बढ़ाने पर सहमति जताई। आरोप है कि पत्नी ने तलाक के फैसले की शर्तों और नियमों का पालन नहीं किया और संपत्ति का ट्रांसफर नहीं किया। शर्तों का पालन न करने पर, पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ अदालत में दिए गए वचन का जानबूझकर उल्लंघन करने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू की।
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याचिकाकर्ता पति के वकील ने तर्क दिया कि 2025 में पत्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की,जिसमें उसने त्रिपुरा हाई कोर्ट के दो न्यायाधीशों के खिलाफ निराधार आरोप लगाए जो पहले इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण विभिन्न न्यूज चैनलों पर किया गया था, साथ ही महिला के हस्ताक्षर से एक प्रेस रिलीज भी जारी की गई थी।
पत्नी की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि उनकी मुवक्किल अपने आचरण के लिए पश्चाताप कर रही हैं और अदालत से बिना शर्त माफी मांगती हैं। साथ ही वह फ्लैट की खरीद के मामले में याचिकाकर्ता के साथ सहयोग करने पर सहमति व्यक्त करती हैं।
अदालत ने महिला को कोर्ट की अवमानना के लिए दंडित किया
वहीं, दूसरी ओर रिकॉर्ड का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि अवमानना करने वाले ने ऐसे बयान दिए थे जिनमें आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन न्यायमूर्ति अरिंदम लोध अपने न्यायिक कर्तव्यों का ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे थे, पक्षपात कर रहे थे और उन्होंने किसी गुप्त मकसद से पक्षपातपूर्ण फैसले सुनाए थे, जिससे न्याय की भावना बाधित हुई थी। अदालत ने महिला को आरोपों का दोषी पाया और अवमानना करने वाले को दंडित करने का फैसला किया।
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