क्रिकेट ऐसा खेल है, जिसमें कभी भी कुछ हो सकता है लेकिन क्या आपने सोचा है कि मुकाबला खत्म होने के बाद मैन ऑफ द मैच का खिताब उसे दिया जाए, जिसने मैच खेला ही ना हो। जी हां, ऐसा ही कुछ हुआ था दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच सन् 2000 में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में। इस मैच में मैन ऑफ द मैच का खिताब किसी खिलाड़ी को नहीं बल्कि ग्राउंड्समैन को दे दिया गया। दरअसल इसके पीछे एक दिलचस्प वजह भी है।

साउथ अफ्रीका अपने ही इस सीरीज पर अपना कब्जा जमा चुकी थी। तीसरा टेस्ट जोहानिसबर्ग में खेला जा रहा था। मौसम बेहद खराब था और भारी बारिश के चलते पहले दिन एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी। ग्रांउड्समैन क्रिस स्कॉट और उनकी टीम ने कड़ी मेहनत कर पिच को अगले दिन खेलने लायक बनाया।

न्यूजीलैंड पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी। मार्क रिचर्डसन और एडम परोरे बतौर सलामी बल्लेबाज मैदान पर उतरे मगर एडम महज 10 रन बनाकर मखाया नतिनी की गेंद पर आउट हो गए। इसके बाद विकेटों का पतझड़ सा लग गया और 113 रन पर ही टीम ने अपने 5 विकेट खो दिए। हालांकि इसके बाद हमीश मार्शल ने 174 गेंदों तक क्रीज में टिककर 40 रन की पारी खेली, जिसके दम न्यूजीलैंड ने स्कोर को किसी तरह 200 तक पहुंचाया। साउथ अफ्रीका की ओर से मखाया नतिनी ने 3 विकेट झटके।

इस दौरान बारिश ने कई बार दखल डाला मगर ग्राउंड्समैन डटे रहे। साउथ अफ्रीका की ओर से बोएटा डिपिनेर ने शतक जड़ा उनके अलावा जैक कैलिस ने नाबाद 79 रन की पारी खेली। हालांकि इसके बाद मैच बारिश के चलते नहीं हो सका और मुकाबले को ड्रॉ घोषित कर दिया गया।

इस दौरान कुल 190.5 ओवर का खेल हुआ। दर्शक यकीनन निराश ही लौटते अगर ग्राउंड्समैन क्रिस स्कॉट और उनकी टीम दिन-रात जुटी ना रहती। टीम के इस जुझारूपन को देखते हुए मैन ऑफ द मैच का खिताब ग्राउंड्समैन को ही दिया गया हालांकि मैन ऑफ द सीरीज मखाया नतिनी के नाम रही।