क्या आपने कभी ऐसे क्रिकेटर के बारे में सुना है जिसने गाने के बोल याद न आने के कारण टेस्ट मैच रुकवा दिया हो? जी हां, भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग यह कारनामा कर चुके हैं। चेन्नई में अप्रैल 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान वीरेंद्र सहवाग अपने टेस्ट करियर के दूसरे तीहरे शतक के करीब थे और क्रीज पर गेंदबाज का सामना करते वक्त गाने की लाइन भूल गए। फिर क्या था सहवाग को जबतक गाने की लाइन याद नहीं आई तक तक मैच रुका रहा।
यह मजेदार वाकया वीरेंद्र सहवाग ने खुद शेयर किया है। सहवाग गोरेगांव स्पोर्ट्स क्लब द्वारा आयोजित किए जाने वाले प्रीमियर लीग के दूसरे सीजन के उद्घाटन समारोह में भाग लेने मुबई पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने यह वाकया शेयर किया। वीरेंद्र सहवाग ने उस घटना को याद करते हुए कहा, ‘एक बार जब मैं चेन्नई में 300 के स्कोर पर बैटिंग कर रहा था, मैं गाने के बोल भूल गया। फिर मैने पवेलियन की ओर इशारा कर इशांत शर्मा को बुलाया जो बारहवें खिलाड़ी थे। जब इशांत फिल्ड पर आए तो मैने उनसे मेरे आईपैड से गाने के बोल सुनकर मुझे बताने के लिए कहा। सबको लग रहा था कि मैने इशांत को ड्रिंक लेकर आने के लिए कहा है, लेकिन कभी कभी 12वें खिलाड़ी का उपयोग इन सब कामों के लिए भी किया जाता है।’
वीरेंद्र सहवाग ने वह गाना भी बताया जिसके लिरिक्स उन्हें याद नहीं आ रहे थे। वह गाना था, ‘तु जाने ना…’। सहवाग का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था जिसमें वह शोएब अख्तर की गेंदबाजी का सामना कर रहे हैं और गाना गुनगुना रहे हैं ‘आ देखें जरा किसमें कितना है दम…’। जब सहवाग से उनकी इस आदत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘गेंद को फेस करने से पहले मेरे दिमाग में यह खयाल आते थे कि मैं इस गेंद को चौका मारूंगा या छक्का मारूंगा। इसी से निजात पाने और अपना ध्यान गेंद पर रखने के लिए मैं क्रीज पर बल्लेबाजी के दौरान गाने गाता था।’
वीरेंद्र सहवाग एक सवाल के दौरान भावुक भी हुए, जब सहवाग से पूछा गया कि उन्हें स्कूल खोलने की प्रेरणा कहां से मिली? इस सवाल के जवाब में वीरेंद्र सहवाग ने कहा, ‘जब मैं प्रैक्टिस करता था तो मुझे रोज घर से एकेडमी और एकेडमी से वापस घर जाने में ढ़ाई-ढ़ाई घंटे लगते थे। एक दिन मेरे पिता जी ने मुझसे कहा, बेटा! जब तुम सफल क्रिकेटर बन जाना तो अपना एक स्कूल खोलना जिसमें स्पोर्ट्स एकेडमी भी हो। तुम अपने जैसे बच्चों को उसमें वो सारी सुविधाएं उपलब्ध कराना जिसके लिए उन्हें बहुत दूर जाना पड़ता है। यह मेरे पिता जी का सपना था और मुझे गर्व है कि मैने उनका सपना पूरा किया।’
