भारत के स्टार बॉक्सर विजेंदर सिंह और तंजानिया के बॉक्सर फ्रांसिस चेका के बीच आज महामुकाबला होगा। विजेंदर डब्ल्यूबीओ एशिया पेसिफिक सुपर मिडिलवेट का खिताब बचाने के लिए चेका से भिडेंगे। विजेंदर ने इसी साल ऑस्ट्रेलिया के कैरी होप को मात देते हुए यह खिताब अपने नाम किया था। पेशेवर मुक्केबाजी में अपनी छाप छोड़ चुके भारतीय बॉक्सर विजेंदर सिंह के सामने यह अब तक की सबसे मुश्किल चुनौती है। पेशेवर मुक्केबाजी में उतरने के बाद से ही विजेंदर सिंह को अब तक हार का सामना नहीं करना पड़ा है।

शनिवार शाम को होने वाले दस राउंड के इस मुकाबले में विजेंदर का सामना अब तक के सबसे अनुभवी प्रतिद्वंद्वी से होगा। मुकाबले से पहले शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर वजन नापने की प्रक्रिया में विजेंदर और चेका आमने-सामने थे। भारतीय मुक्केबाज जहां हमेशा की तरह शांतचित था वहीं, चेका उत्तेजित नज़र आए। चेका ने विजेंदर से कहा, ‘मैं अब रिंग में ही बात करूंगा।’ जिसके जवाब में विजेंदर ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, ‘मेरा काम मुक्के जड़ना है और मैं रिंग में वही करूंगा। यह खिताब कहीं नहीं जा रहा है।’ इस दौरान उन्होंने फैंस से एक बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा, ‘स्टेडियम में जितनी तालियां बजेंगी। मैं चेका पर उतने ही मुक्के बरसाऊंगा। नॉक आउट मेरा काम है।’

तंजानिया के 34 वर्षीय चेका ने अब 43 मुकाबले लड़े हैं जिसमें से 32 में उन्होंने जीत दर्ज की। इनमें से 17 मुकाबले नॉकआउट थे। यही नहीं चेका ने अपने 16 साल के करियर में 300 राउंड लड़े हैं जबकि विजेंदर ने अब तक केवल 27 राउंड ही खेले हैं। 34 साल के चेका इस समय अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी महासंघ (आईबीएफ) की सुपर मिडिलवेट डिवीजन में मौजूदा अफ्रीकन चैम्पियन हैं। महज 17 साल की उम्र में पेशेवर मुक्केबाजी की दुनिया में कदम रखने वाले चेका के पास प्रोफेशनल बॉक्सिंग का काफी अनुभव है। विजेंदर ने भारतीय मुक्केबाजी इतिहास में याद रखने लायक कई कारनामे किए हैं। हरियाणा के इस खिलाड़ी ने बीजिंग ओलिंपिक-2008 में भारत को मुक्केबाजी में पहला पदक दिलाया था। उनके पास शनिवार को एक और इतिहास रचने का मौका है।