खेल मंत्रालय ने देश में विश्वविद्यालय स्तर के खेलों में प्रशासनिक कमियों की ओर इशारा करते हुए एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि यह संस्था खिलाड़ियों के विकास और नियोजन से जुड़े अपने दायित्व को निभाने में नाकाम रही है।

पिछले साल जर्मनी के राइने रूर में हुए विश्व यूनिवर्सिटी खेलों के दौरान एआईयू की काफी निंदा हुई थी, जहां कथित प्रशासनिक चूक के कारण 12 में से छह बैडमिंटन खिलाड़ियों को हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। अधिकारी प्रबंधकों की बैठक के दौरान सभी नाम सही ढंग से जमा नहीं कर पाए, जिससे भारी हंगामा हुआ, क्योंकि प्रभावित खिलाड़ियों ने आरोप लगाया कि एआईयू के कुप्रबंधन के कारण उनके करियर को नुकसान हुआ है।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने एक जानकार सूत्र के हवाले से लिखा, ‘खिलाड़ियों को परेशानी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खेलमंत्री मनसुख मांडविया का साफ तौर पर कहना है कि इस तरह की चूकों के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।’ एआईयू देश में विश्वविद्यालय स्तर के खेलों के लिये नोडल इकाई है। इसने जांच समिति बनाई जिसने खेलों की प्रविष्टियां सही तरीके से हैंडल नहीं कर पाने की बात मानी और अपने संयुक्त सचिव बलजीत सिंह सेखों को निलंबित कर दिया जो टीम के साथ गए थे।

एआईयू सचिव डॉक्टर पंकज मित्तल ने बाद में कहा कि एआईयू प्रभावित खिलाड़ियों के लिये पदक और प्रमाण पत्र हासिल करने में कामयाब रही है। बैडमिंटन टीम ने कांस्य पदक जीता था। पंकज मित्तल ने बार-बार पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया कि आठ जनवरी को जारी मंत्रालय के नोटिस पर एआईयू का क्या जवाब होगा।

समाचार एजेंसी को एक सूत्र ने बताया कि उसने शुरुआती 10-दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद और समय मांगा है। एआईयू को जारी नोटिस में विश्व यूनिवर्सिटी खेलों के दौरान हुई गड़बड़ी का जिक्र है और कहा गया है कि यूनिवर्सिटी खेल व्यवस्था से निकलने वाले भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन का स्तर अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहता है। भारत ने विश्व यूनिवर्सिटी खेलों में 20वां स्थान हासिल करते हुए दो स्वर्ण, पांच रजत और पांच कांस्य पदक जीते थे।

खेल मंत्रालय का मानना है कि एआईयू की रणनीति, समन्चय,खिलाड़ियों के विकास और प्रशासनिक ढांचे में गंभीर कमियां हैं। पिछले साल हुए टूर्नामेंट का उल्लेख करते हुए मंत्रालय ने कहा कि चुने हुए खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं कर पाने की वजह से उन्हें ऐसी मुश्किलें हुईं जिनसे बचा जा सकता था और अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी खेल मंच पर भारत की छवि पर बुरा असर पड़ा। मंत्रालय के एक सूत्र ने यह भी इशारा किया था कि यूनिवर्सिटी खेलों को संभालने के लिए एक राष्ट्रीय महासंघ बनाने पर भी विचार किया जा सकता है। IND vs NZ: इशान किशन की दो साल बाद टीम इंडिया में वापसी, नागपुर टी20 में तीन नंबर पर उतरेंगे