भारत के प्रतिष्ठित नेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट संतोष ट्रॉफी 2026 के कार्यक्रम का ऐलान हो गया है। इस टूर्नामेंट के 79वें संस्करण के लिए असम को मेजबानी मिली है। असम इससे पहले कुल छह बार इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर चुका है। सबसे पहले 67 साल पहले 1959-60 में इसकी मेजबानी की थी। यानी सातवीं बार राज्य को संतोष ट्रॉफी की मेजबानी का अवसर मिला है।
इस टूर्नामेंट के क्वालीफाइंग दौर के लिए सभी राज्यों की टीमों को नौ ग्रुपों में बांटा गया था। हर ग्रुप की टॉप टीम फाइनल दौर में एंट्री कर चुकी है। मेजबान और पिछले सत्र की उपविजेता असम के साथ पश्चिम बंगाल और केरल को सीधे फाइनल दौर में एंट्री मिली थी। इस तरह फाइनल राउंड में कुल 12 टीमें खेलेंगी। तीन टीमें सीधे एंट्री कर रही हैं और 9 टीमें क्वालिफायर के बाद तय होकर आई हैं।
फाइनल राउंड के लिए 12 टीमों को छह-छह के दो ग्रुप में बांटा जाएगा। टॉप चार टीमें दोनों ग्रुप की क्वार्टरफाइनल में जगह बनाएंगी। नॉकआउट क्वार्टर फाइनल दो और तीन फरवरी को होंगे जबकि दोनों सेमीफाइनल पांच फरवरी को और फाइनल मुकाबला आठ फरवरी को खेला जाएगा।
कौन से ग्रुप में किसे मिली जगह?
ग्रुप ए में 33 बार की चैंपियन और 14 बार की उपविजेता बंगाल की टीम दो बार की उपविजेता तमिलनाडु के साथ मौजूद है। इसके अलावा असम, नागालैंड, राजस्थान और उत्तराखंड की टीमें भी इस ग्रुप का हिस्सा हैं। यह चारों टीमें कभी इस टूर्नामेंट के फाइनल तक में जगह नहीं बना पाई हैं।
वहीं ग्रुप बी में चार पूर्व चैंपियन और एक बार की एक उपविजेता टीम मौजूद है। इस ग्रुप में आठ बार की चैंपियन और आठ बार की उपविजेता पंजाब की टीम है। वहीं केरल की टीम सात बार इस टूर्नामेंट में जीती है और 9 बार उपविजेता रही है। केरल भी ग्रुप बी का हिस्सा है।
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सर्विसेज ने सात बार और रेलवे ने तीन बार संतोष ट्रॉफी का खिताब जीता है। ग्रुप बी काफी टक्कर का नजर आ रहा है। मेघालय और ओडिशा भी ग्रुप बी में शामिल होंगी। मेघालय एक बार उपविजेता रही है और ओडिशा ने एक बार भी फाइनल तक में जगह नहीं बनाई है।
