भारत के निवर्तमान डेविस कप कप्तान आनंद अमृतराज ने गुरुवार (22 दिसंबर) को अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के उन्हें फरवरी में विदाई मुकाबला दिये जाने के फैसले को कुछ कड़वा-कुछ मीठा करार करते हुए भविष्यवाणी की उनकी जगह जिम्मेदारी संभालने वाले महेश भूपति को आगे मुश्किल समय से गुजरना होगा। एआईटीए की कार्यकारी समिति ने अमृतराज को एक अंतिम मुकाबला देने का फैसला किया है। संघ ने उन्हें एक साल का कार्यकाल नहीं दिया है जैसी उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी लेकिन उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबला जीतने का मौका दिया है ताकि वह सम्मान से विदा हो सकें। अमृतराज ने कहा, ‘एआईटीए का यह दिलचस्प फैसला है। मैं थोड़ा निराश हूं क्योंकि मैंने उन्हें एक और साल देने का अनुरोध किया था, जिसके बाद अगर वे चाहते थे तो मैं स्वेच्छा से कप्तानी से हट जाता। अब ऐसा लगता है कि न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच मेरा विदाई मैच होगा और पिछले तीन वर्षों को देखते हुए यह फैसला मेरे लिये कुछ कड़वा-कुछ मीठा है।’
अमृतराज ने 2013 में एस पी मिश्रा से कप्तानी ली थी, जब दिग्गज खिलाड़ियों ने एआईटीए के डेविस कप मुद्दों का निपटारा करने के तरीके के खिलाफ विरोध किया था। अमेरिका में बसे अमृतराज ने कहा कि अप्रैल से कप्तानी संभालने वाले भूपति के सामने कड़ी चुनौती होगी क्योंकि खिलाड़ी उनके तरीके से खुश थे। अमृतराज ने हालांकि ज्यादा विस्तार से नहीं बताया लेकिन उन्होंने कहा, ‘कल तक, मैं तो यह भी नहीं जानता था कि महेश की कप्तानी में दिलचस्पी है। उसके आगे निश्चित रूप से चुनौतियां होंगी जैसी सभी नयी कप्तानों के सामने होती हैं और उसे इनका निपटारा वैसे ही करना होगा जैसा वह सर्वश्रेष्ठ समझते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘उनकी प्रबंधन शैली निश्चित रूप से मेरी शैली से अलग होगी और टीम के साथ मेरे तालमेल को देखते हुए उन्हें इसमें दिक्कत होगी।’
