तारीख थी 23 नवंबर 1930। रविवार का दिन था। ब्रिटिश प्लेयर कोलकाता में मैच खेलने आए हुए थे। इन ब्रिटिश प्लेयर में जैक हॉब्स और हर्बर्ट सटक्लिफ भी शामिल थे। इनका मैच कलकत्ता स्पोर्टिंग यूनियन के साथ होने वाला था। स्पॉर्टिंग यूनियन साल 1896 में सारदा रंजन रॉय और हेमंगा बोस ने बनाई थी। इसकी तरफ से कार्तिक, गणेश, बपी, बाबू पंकज अंबर, प्रणब खेलते थे, साथ ही मंटू बनर्जी, सुब्रता गुहा, दिलीप दोषी, देवंग गांधी भी इनमें शामिल थे। इनके साथ ही इस क्लब से दत्तू पाढ़कर, माधव आप्टे और रामनाथ केन्नी भी जुड़े हुए थे। मैंच कॉलेज स्ट्रीट के पास मार्क्स स्कावयर पर था। इस मैदान के चारों ओर तीन मंजिला घर बने हुए थे। इन घरों की बालकनी पर मैच देखने वाले लोगों की भीड़ रहती थी। काफी संख्या में इन घरों की छत और बालकनी से लोग मैच देखते थे। समाचार पत्र एडिलेड ने लिखा है कि विदेशी संवाददाताओं के लिए यह एक अनोखा अनुभव था। मैच के दौरान मैदान में पक्षी आ रहे थे। इसके साथ ही आधे कपड़े पहने लोगों ने बाउंडरी लाइन पर कब्जा कर रखा था।
मैच में ब्रिटिश खिलाड़ी जैक हॉब्स और हर्बर्ट सटक्लिफ आकर्षण के मुख्य बिंदू थे। लेकिन हॉब्स ने उस दिन मैच खेलने से मना कर दिया था। इसके पीछे वजह थी कि हॉब्स रविवार के दिन क्रिकेट नहीं खेलते थे। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘हॉब्स ने कहा था कि उसे माफ कर दें, लेकिन वे रविवार के दिन मैच नहीं खेल सकते। इसके साथ ही उन्होंने इसके पीछे धार्मिक वजह भी बताई थी। उन्होंने कहा था कि मेरे रविवार के दिन क्रिकेट खेलने से भारत में ईसाई धर्म को ठेस पहुंच सकती है। ईसाई धर्म में रविवार के दिन कुछ भी नहीं किया जाता। साथ ही उनकी पत्नी ने भी रविवार के दिन उनके क्रिकेट खेलने पर आपत्ति जताई थी।’
हालांकि, सटक्लिफ ने मैच खेला। यह सिंगल वनडे इनिंग मैच था। ब्रिटिश खिलाड़ियों ने पहले बल्लेबाजी की। ब्रिटिश टीम ने दो विकेट गंवाकर 209 रन बनाए थे। इसमें सटक्लिफ ने 110 रन और नायडू ने 56 रन बनाए थे। इसके बाद अगले दिन ईडन गार्डन में दूसरा मैच था।
