चौतरफा आलोचनाओं के बाद दागी सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को आजीवन अध्यक्ष पद से हटाने को बाध्य हुए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को खेल मंत्रालय से दोबारा मान्यता मिलेगी जिसने ओलंपिक संस्था के फैसले का स्वागत किया है। आईओए अध्यक्ष एन रामचंद्रन ने मंत्रालय के कारण बताओ नोटिस के जवाब में स्पष्ट किया है कि कलमाड़ी और चौटाला की नियुक्ति का फैसला तकनीकी कारणों से रद्द कर दिया गया है। खेल सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा, ‘‘मैंने पूरा पत्र नहीं पढ़ा है। मैंने सिर्फ टिकर देखा है।
हम आईओए के फैसले का स्वागत करते हैं कि उन्होंने अपने संविधान का पालन किया। निलंबन पर हमारा बयान साफ कहता है कि यह तभी हटा दिया जाएगा जब आईओए अपने फैसले को पलट देगा। ऐसा हो गया है और हम इसका स्वागत करते हैं।’ इससे पहले खेल मंत्रालय से फिर मान्यता हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति :आईओसी: की संभावित कार्रवाई से बचने के लिए कलमाड़ी और चौटाला की नियुक्ति को रद्द घोषित किया गया है।
कलमाड़ी और चौटाला को 27 दिसंबर को चेन्नई में आईओए की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के दौरान इस मानद पद पर नियुक्त करने का फैसला किया गया था लेकिन आईओए के अधिकांश सदस्यों ने इसका विरोध किया था जिसके बाद ओलंपिक संस्था को अपना फैसला बदलने को बाध्य होना पड़ा। विरोध के बाद कलमाड़ी ने अपने नाम को पाक साफ साबित नहीं करने तक पद स्वीकार करने से इनकार किया था जबकि चौटाला ने भी कहा था कि अगर आईओसी कोई आपत्ति जताता है तो वह हट जाएंगे।
इससे पहले खेल मंत्रालय से फिर मान्यता हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति :आईओसी: की संभावित कार्रवाई से बचने के लिए कलमाड़ी और चौटाला की नियुक्ति को रद्द घोषित किया गया है।
कलमाड़ी और चौटाला को 27 दिसंबर को चेन्नई में आईओए की वार्षिक आम बैठक :एजीएम: के दौरान इस मानद पद पर नियुक्त करने का फैसला किया गया था लेकिन आईओए के अधिकांश सदस्यों ने इसका विरोध किया था जिसके बाद ओलंपिक संस्था को अपना फैसला बदलने को बाध्य होना पड़ा।
विरोध के बाद कलमाड़ी ने अपने नाम को पाक साफ साबित नहीं करने तक पद स्वीकार करने से इनकार किया था जबकि चौटाला ने भी कहा था कि अगर आईओसी कोई आपत्ति जताता है तो वह हट जाएंगे। मंत्रालय के कारण बताओ नोटिस के जवाब में रामचंद्रन ने श्रीनिवास को लिखा, ‘‘यह 30 दिसंबर के पत्र के संदर्भ में है जिसमें भारतीय ओलंपिक संघ की मान्यता रद्द की गई जो गैरजरूरी था…. हमारा पक्ष सुने बिना एकतरफा फैसला किया गया।’
आईओए प्रमुख ने दावा किया कि वार्षिक आम बैठक में दो आजीवन अध्यक्ष नियुक्त करने का प्रस्ताव था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आईओए ने इसे स्वीकार कर लिया। रामचंद्रन ने दावा किया, ‘‘चेन्नई में 27 दिसंबर 2016 को हुई वार्षिक आम बैठक के अंतिम हिस्से में एक सदस्य ने मुद्दा रखा कि आईओए को दो आजीवन सदस्य नामित करने चाहिए। संविधान के अनुच्छेद सात के अनुसार कम से कम सात दिन पहले लिखित में कोई नोटिस नहीं दिया गया इसलिए प्रस्ताव पर मतदान नहीं हुआ और इसे पारित नहीं किया गया।’
