फुटबॉल का महाकुंभ फीफा विश्व कप का 21वां संस्करण गुरुवार को लुज्नियाकी स्टेडियम में शानदार उद्घाटन समारोह के साथ आगाज हुआ। इस समारोह में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और फीफा के अध्यक्ष गियानी इन्फैनटिनो उपस्थित थे। साथ ही अरब के राष्ट्राध्यक्ष भी अपनी टीम की हौसलाअफजाई के लिए पहुंचे हैं। सबसे पहले स्पेन के पूर्व कप्तान और गोलकीपर इकर कासिलास और मॉडल नतालिया वोडियानोवा विश्व कप ट्रॉफी को लेकर मैदान पर आए। इसके कुछ देर बाद ब्राजील के पूर्व कप्तान रोनाल्डो ने मैदान पर एक बच्चे के साथ कदम रखा और उद्घाटन समारोह का आगाज किया। दुनिया की 32 टीमें हिस्सा लेने वाली इस वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का नाम नहीं है। भारतीय फुटबॉल का गोल्डन पीरियड कहे जाने वाले 50वें और 60वें दशक ब्राजील में फीफा वर्ल्ड कप आयोजित किया गया था। इस वर्ल्डकप में भारतीय फुटबॉल टीम को भी हिस्सा लेने का मौका मिला था। भारत के लिए यह गर्व की बात थी कि टीम ब्राजील जाकर इस बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली थी।
भारतीय फुटबॉल फैन्स इस खबर से बेहद खुश थे, क्योंकि 1950 भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए शानदार गुजरा था। इस वर्ल्ड कप को भी भारतीय टीम आसानी से अपने नाम कर सकती थी। भारत की फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) ने अंतिम समय में भारतीय खिलाड़ियों को ब्राजील भेजने से मना कर दिया। दरअसल, एआईएफएफ के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो खिलाड़ियों का किराया दे सकें। ब्राजील को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने अपनी तरफ से खिलाड़ियों को किराया देने का फैसला किया।
भारत की मुश्किलें यही खत्म नहीं हुई, दरअसल फीफा में खेलने वाले हर खिलाड़ी जूता पहनकर टूर्नामेंट में हिस्सा लिया करता था और भारतीय खिलाड़ी उस दौरान नंगे पैर ही फुटबॉल खेला करते थे। जूते नहीं होने की वजह से भारतीय खिलाड़ियों ने आखिरकार इस टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया।
