खेल के मैदान पर मेडल हासिल करना हर खिलाड़ी के लिए बड़ा सपना होता है। लेकिन, अगर कोई खिलाड़ी मुश्किल परिस्थितियों और तमाम समस्याओं से लड़कर इस मुकाम को हासिल करता है तो निश्चित रूप से यह सराहनीय भी है और प्रेरणादायी भी। ऐसी ही कहानी है wrestling नेशनल्स में सिल्वर मेडल जीतने वाले Sonaba Gongane Tanaji की है। जिन्होंने परिवार पालने के लिए खेल की दुनिया को छोड़ दिया था और ट्रक ड्राइवरी का पेशा अपना लिया था। खास बात रही कि बिना लाइसेंस के वो ट्रक चलाते रहे और करीब 4 साल तक अपने परिवार को इसी तरह से संभाला।
तानाजी ने पिछले सप्ताह जालंधर में हुए एक इवेंट में 61 किग्रा कैटगरी में दूसरा स्थान हासिल किया। उन्हें World U-23 championship के इस मुकाबले में रविंदर के हाथों हार का सामना करना पड़ा लेकिन यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि रही। 23 साल के इस खिलाड़ी ने इस वेन्यू के बाहर ही अपनी पिक अप खड़ी कर रखी थी। इस खिलाड़ी ने कहा कि मैं अपने मेडल को अपनी ट्रक में रखना चाहता था जिसे मैने करीब 4 साल चलाया है और कई बार दिन में 14 घंटे मेहनत करके मैने अपना परिवार पाला है।
उन्होंने बताया कि 2006 में जब मैने wrestling शुरू की तो मेरे पिता का स्वास्थ्य बड़ा मसला था। 4.5 एकड़ की जमीन में मैं उतना नहीं कमा पाता था जितनी की मेरी जरूरत थी। इसीलिए मैने कुछ समय बाद ही अखाड़ा छोड़कर मिनी पिक खरीद ली और लोन ले लिया। उन्होंने बताया कि दिन के 400-500 रुपये मैं बचा लेता हूं। तानाजी ने बताया कि मेरे पास लाइसेंस भी नहीं है और इसी डर से कि मैं कहीं पकड़ा न जाउं मैं शहरों में नहीं घुसता हूं।
इसके बाद एक बार उनकी मुलाकात 2008 के Youth Commonwealth Games champion Ranjeet से हुई। जिन्होंने उन्हें खूब प्रेरित किया और फिर तानाजी ने अखाड़े में वापसी की। अपने शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें मराठा रेजिमेंट में हवलदार की नौकरी भी मिल गई। वहीं, अब वो रेसलिंग की दुनिया में और नाम कमाना चाहते हैं। नेशनल कोच जगमंदर सिंह को भरोसा है कि तानाजी एक दिन देश का नाम जरूर रोशन करेंगे।


