विश्व चैंपियन भारोत्तोलक साइखोम मीराबाई चानू (48 किलो) ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन करते हुए भारत को 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण पदक दिलाया। चानू ने यादगार प्रदर्शन करते हुए स्रैच में राष्ट्रमंडल और खेलों का रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने तीनों प्रयासों में 80 किलो, 84 किलो और 86 किलो वजन उठाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में भी अपने शरीर के वजन से दुगुना वजन उठाया। उन्होंने तीन सफल प्रयासों में 103 किलो, 107 किलो और 110 किलो वजन उठाकर खेलों का ओवरऑल रिकॉर्ड अपने नाम किया।
चानू 2016 में रियो ओलंपिक के दौरान क्लीन एवं जर्क में अपने तीनों की अटेंप्ट में फेल रही थीं। वह रियो में उस वक्त ओवरऑल स्कोर में जगह तक नहीं बना सकी थीं। मीराबाई ने 2016 में पहला प्रयास 104 किग्रा भार उठाने का किया। उसमें चानू नाकाम रहीं। वहीं 106 किग्रा के दूसरे प्रयास में भी उनको नाकामी ही हाथ लगी थी, जबकि इससे पहले उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 107 किग्रा रह चुका था। इसके बाद चानू काफी डिप्रेशन में रहीं। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी खामियों को दूर करने की कोशिश शुरू कर दीं।
चानू ने ग्लास्गो में पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था। उन्होंने कुल 196 किलो (86 और 110 किलो) वजन उठाया। इससे पहले उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 194 किलो (स्रैच 85 और क्लीन एंड जर्क 109) था जो उसने कुछ महीने पहले विश्व चैंपियनशिप में बनाया था।
कॉमनवेल्थ गेम्स-2018 में चानू ने जीत के बाद कहा, ‘‘मुझे रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद नहीं थी लेकिन जब मैं यहां आई तो सोचा था कि रिकॉर्ड बनाउंगी। मैं शब्दों में नहीं बता सकती कि इस समय कैसा महसूस कर रही हूं। मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की है। मैं बहुत खुश हूं।यह मेरा दूसरा राष्ट्रमंडल पदक है और बहुत अच्छा लग रहा है।’’
उन्होंने कहा,‘‘मेरा अगला लक्ष्य एशियाई खेल है। मैं इससे भी बेहतर करना चाहती हूं। वहां काफी कठिन स्पर्धा होगी और मुझे बहुत मेहनत करनी होगी। यहां प्रतिस्पर्धा नहीं थी लेकिन मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना था। एशिया में भारोत्तोलन में काफी कठिन प्रतिस्पर्धा है क्योंकि चीन और थाईलैंड होंगे। इसके बावजूद मुझे अच्छे प्रदर्शन का यकीन है। इससे ओलंपिक में नाकामी के जख्मों को भरने में मदद मिलेगी। वहां किस्मत ने साथ नहीं दिया।’’
