उच्चतम न्यायालय द्वारा बीसीसीआई अध्यक्ष और सचिव को हटाये जाने के बाद बोर्ड के सीनियर उपाध्यक्ष गोकाराजू गंगराजू ने सोमवार (2 जनवरी) को साफ तौर पर कहा कि उनका आंध्र क्रिकेट संघ तुरंत प्रभाव से लोढ़ा समिति के सुझाव लागू करेगा। गंगराजू ने कहा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं कि यह उच्चतम न्यायालय का फैसला है। आंध्र क्रिकेट संघ का अध्यक्ष होने के नाते हम तुरंत प्रभाव से सारे सुझाव लागू करेंगे। यदि हमें विश्राम की अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) में जाना पड़े तो हम जायेंगे। भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ना चाहिये।’ ऐसी अटकलें हैं कि वह अंतरिम अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं।

उन्होंने कहा,‘मुझे अभी इस पर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। डीडीसीए के सी के खन्ना भी सीनियर उपाध्यक्ष हैं लेकिन यह अस्थायी पद ही होगा क्योंकि मुझे विश्राम की अवधि में जाना होगा। यदि मुझे कोई जिम्मेदारी दी गई तो मैं पूरी ईमानदारी से उसका निर्वाह करूंगा।’ यह पूछने पर कि अभी तक आंध्र क्रिकेट संघ ने लोढ़ा समिति के सुझाव लागू क्यों नहीं किये, उन्होंने कहा,‘क्योंकि अभी तक हर कोई साथ था लेकिन अब फैसला आने के बाद लागू नहीं करने का कोई कारण नहीं है। हम लंबे समय से बीसीसीआई में है और हमें पता है कि प्रशासन कैसे चलाना है।’

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले शिर्के- मुझे कोई दिक्कत नहीं, बीसीसीआई में मेरा काम खत्म

बीसीसीआई के बर्खास्त सचिव अजय शिर्के ने सोमवार (2 जनवरी) को कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा उन्हें पद से हटाये जाने के फैसले से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां प्रशासनिक बदलाव का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीसीसीआई की स्थिति पर नहीं पड़ेगा। शिर्के ने न्यायालय के फैसले के बाद कहा,‘इस फैसले पर मेरी कोई प्रतिक्रिया नहीं है। यदि यह उच्चतम न्यायालय का फैसला है कि मैं सचिव नहीं रहूं तो इससे सरल क्या हो सकता है। बीसीसीआई में मेरा काम खत्म हो गया है।’ यह पूछने पर कि बोर्ड अगर लोढ़ा समिति के सुझावों को लागू कर देता तो क्या इस स्थिति से बचा जा सकता था, शिर्के ने कहा कि इस मसले से दूसरी तरह से निपटने का कोई सवाल ही नहीं था।

उन्होंने कहा,‘आखिर में बीसीसीआई सदस्यों से ही बनती है। यह मेरे या अध्यक्ष की बात नहीं थी बल्कि यह सदस्यों की बात थी।’ शिर्के ने ब्रिटेन से कहा,‘इतिहास में जाने की कोई वजह नहीं है। लोग अलग अलग तरीके से अतीत का आकलन कर सकते हैं। मेरा पद से कोई निजी लगाव नहीं है। पहले भी मैंने इस्तीफा दिया है। मेरे पास करने के लिये बहुत कुछ है। बोर्ड में जगह थी तो मैं आया और निर्विरोध चुना गया। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है और कोई पछतावा भी नहीं है।’