लोढ़ा समिति के सुधारवादी कदम रोकने के लिए सोमवार (2 जनवरी) को बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में बर्खास्त किए गए अनुराग ठाकुर ने उच्चतम न्यायालय के आदेश पर कहा कि अगर शीर्ष अदालत को लगता है कि क्रिकेट बोर्ड सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के मार्गदर्शन में अच्छा करेगा तो वे उन्हें शुभकामनाएं देती हैं। उच्चतम न्यायालय ने 18 जुलाई 2015 को लोढ़ा समिति की सिफारिशों को अनिवार्य बनाने का आदेश दिया था जिसे बोर्ड लागू करने में विफल रहा जिसके बाद शीर्ष अदालत ने ठाकुर और बीसीसीआई सचिव अजय शिर्के को बाहर का रास्ता दिखा दिया। ठाकुर ने हालांकि जोर देकर कहा कि बीसीसीआई देश में सर्वश्रेष्ठ रूप से संचालित खेल संस्था है।

ठाकुर ने कहा, ‘मेरे लिए यह निजी जंग नहीं थी, यह खेल संस्था की स्वायत्ता की लड़ाई थी। मैं उच्चतम न्यायालय का उतना की सम्मान करता हूं जितना किसी नागरिक को करना चाहिए। अगर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को लगता है कि बीसीसीआई सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नेतृत्व में बेहतर कर सकता है तो मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। मुझे यकीन है कि भारतीय क्रिकेट उनके मार्गदर्शन में अच्छा करेगा।’ उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप जारी करके उच्चतम न्यायालय के आदेश पर प्रतिक्रिया दी।

ठाकुर ने कहा, ‘भारतीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ हित और खेलों की स्वायत्ता के लिए मेरी प्रतिबद्धता हमेशा बरकरार रहेगी।’ मई 2016 में बीसीसीआई अध्यक्ष बनने से पहले ठाकुर बोर्ड के संयुक्त सचिव और सचिव थे। भारतीय जनता पार्टी का यह सांसद एक दशक से अधिक समय तक हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ का अध्यक्ष भी रहा। ठाकुर ने कहा, ‘मुझे भारतीय क्रिकेट की सेवा करने का मौका मिला। प्रशासन और खेल के विकास के मामले में पिछले कुछ वर्ष सर्वश्रेष्ठ रहे। बीसीसीआई देश में सबसे बेहतर संचालित खेल संगठन है। भारत के पास सर्वश्रेष्ठ बुनियादी ढांचा है जिससे बीसीसीआई की मदद से राज्य संघों ने तैयार किया है और इसकी देखरेख करते हैं। भारत में पास दुनिया में किसी भी देश से अधिक स्तरीय खिलाड़ी हैं।’ ठाकुर और शिर्के को उनके पदों से हटाने के अलावा उच्चतम न्यायालय ने बीसीसीआई के बर्खास्त प्रमुख के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया शुरू करते हुए उनसे जवाब मांगा कि लोढ़ा सिफारिशों को लागू करने से रोकने के लिए उन्हें जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले शिर्के- मुझे कोई दिक्कत नहीं, बीसीसीआई में मेरा काम खत्म

बीसीसीआई के बर्खास्त सचिव अजय शिर्के ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा उन्हें पद से हटाये जाने के फैसले से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां प्रशासनिक बदलाव का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीसीसीआई की स्थिति पर नहीं पड़ेगा। शिर्के ने न्यायालय के फैसले के बाद कहा,‘इस फैसले पर मेरी कोई प्रतिक्रिया नहीं है। यदि यह उच्चतम न्यायालय का फैसला है कि मैं सचिव नहीं रहूं तो इससे सरल क्या हो सकता है। बीसीसीआई में मेरा काम खत्म हो गया है।’ यह पूछने पर कि बोर्ड अगर लोढ़ा समिति के सुझावों को लागू कर देता तो क्या इस स्थिति से बचा जा सकता था, शिर्के ने कहा कि इस मसले से दूसरी तरह से निपटने का कोई सवाल ही नहीं था।

उन्होंने कहा,‘आखिर में बीसीसीआई सदस्यों से ही बनती है। यह मेरे या अध्यक्ष की बात नहीं थी बल्कि यह सदस्यों की बात थी।’ शिर्के ने ब्रिटेन से कहा,‘इतिहास में जाने की कोई वजह नहीं है। लोग अलग अलग तरीके से अतीत का आकलन कर सकते हैं। मेरा पद से कोई निजी लगाव नहीं है। पहले भी मैंने इस्तीफा दिया है। मेरे पास करने के लिये बहुत कुछ है। बोर्ड में जगह थी तो मैं आया और निर्विरोध चुना गया। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है और कोई पछतावा भी नहीं है।’