ऑस्ट्रेलिया के एडलैड में चल रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप क्वालिफायर मैच के दौरान सऊदी अरब की फुटबॉल टीम ने लंदन आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए एक मिनट का मौन रखने से मना कर दिया जिसके बाद ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल प्रशंसकों ने इसे बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया। प्रशंसकों ने कहा कि यह उन मृत लोगों के लिए बहुत ही अपमानजनक है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब सऊदी अरब की टीम ने ऐसा बर्ताव किया हो। इससे पहले 2015 में सऊदी टीम ने ऑस्ट्रेलिया में आयोजित किए गए एशियाई कप के दौरान उनके लिए भेजी गई बस में बैठने से केवल इसलिए इनकार कर दिया था क्योंकि उस बस की ड्राइवर एक महिला थी। बाद में टीम को बस में सफर करने के लिए मना लिया गया था लेकिन टीम ने आयोजनकर्ताओं से पूरे कार्यक्रम के लिए उनके लिए पुरुष बस ड्राइवर रखने की बात कही थी।
आपको बता दें कि बुधवार को सऊदी और मेजबान ऑस्ट्रेलियन टीम के बीच मैच हुआ था। अधिकारियों द्वारा दोनों टीमों को पहले ही बता दिया गया था कि सभी लंदन आतंकी हमले में मारे गए लोगों के लिए एक मिनट का मौन रखेंगे। बता दें कि ऐसा इसलिए किया जा रहा था क्योंकि इस हमले में दो ऑस्ट्रेलियाई नागरिक की भी जान चली थी। सऊदी टीम ने ऐसा करने से मना कर दिया जिसके बाद वहां मौजूद फुटबॉल प्रशंसकों ने उनकी काफी आलोचना की। जहां एक तरफ फुटबॉल ग्राउंड में सब एक मिनट का मौन किए खड़े तो वहीं दूसरी ओर सऊदी की टीम खुद को मैच से पहले तैयार करने में लगी हुई थी।
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प्रशंसकों द्वारा आलोचना होता देख सऊदी अरब टीम के अधिकारियों ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि हम किसी की भावना को आहत नहीं पहुंचाना चाहते थे लेकिन यह सब हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि कई ऐसे मौके आए हैं जहां पर सऊदी की टीम ने मौन रखा है।अधिकारियों ने कहा कि पिछले साल दोहा में एफसी बर्सेलोना और एल-एहली एफसी के बीच मैच हुआ था। इस मैच से पहले हमारी टीम ने ब्राजील की फुटबॉल टीम के लिए एक मिनट का मौन रखा था, जिनकी प्लेन क्रैश होने के कारण मृत्यु हो गई थी।
