कभी टीम कॉम्बिनेशन के चलते बेंच पर बैठना पड़ता था, तो कभी शानदार फॉर्म के बावजूद प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलती थी। हालांकि, क्रिकेट में कहा जाता है कि जो खिलाड़ी मुश्किल वक्त में भी खुद पर भरोसा बनाए रखते हैं, वही मौका मिलते ही इतिहास रचते हैं।
अमन मोखाड़े की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। 2024-25 का सीजन उनके करियर का सबसे कठिन दौर रहा, जहां रन बनाने के बावजूद उन्हें लगातार मौके नहीं मिल पा रहे थे। हालांकि, 2025-26 की विजय हजारे ट्रॉफी में वही अमन मोखाड़े विदर्भ के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बनकर उभरे।
अमन मोखाड़े ने गुरुवार 15 जनवरी को सेमीफाइनल में शतक जड़कर विदर्भ को पहली बार कर्नाटक के खिलाफ जीत दिलाते हुए विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के फाइनल में पहुंचा दिया। वह विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी बने। अमन मोखाड़े ने टूर्नामेंट के 9 मैच में 97.62 के औसत और 111.57 के स्ट्राइक रेट से 781 रन बनाए हैं। इसमें उनके पांच शतक भी शामिल हैं।
विजय हजारे ट्रॉफी में अमन मोखाड़े का धमाका: लिस्ट A में सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले भारतीय बने
अमन मोखाड़े के बारे में कहना गलत नहीं होगा कि जिस खिलाड़ी को कभी टीम से बाहर बैठना पड़ता था, वही अब विदर्भ के इतिहास का सबसे बड़ा हीरो बन चुका है। यह कहानी सिर्फ रनों की नहीं, बल्कि सब्र, मेहनत और खुद पर भरोसे की जीत की है।
अमन मोखाड़े को नहीं मिले मौके
अमन मोखाड़े के लिए पिछला सीजन किसी परीक्षा से कम नहीं था। विदर्भ की टीम में अथर्व तायडे, यश राठौड़, करुण नायर और दानिश मलिवार जैसे बल्लेबाज मौजूद थे, जिससे उन्हें लगातार बाहर बैठना पड़ा। प्रैक्टिस मैचों में रन बनाने के बावजूद टीम कॉम्बिनेशन उनके खिलाफ जा रहा था।
अमन खुद मानते हैं कि यह दौर मानसिक रूप से बेहद कठिन था। अमन मोखाड़े ने ईएसपीएनक्रिकइंफो से बातचीत में कहा था, ‘मैं प्रैक्टिस मैचों में खूब रन बना रहा था, लेकिन टीम कॉम्बिनेशन (टीम संयोजन) और प्रतिस्पर्धा के चलते मुझे लगातार मौके नहीं मिले।’
करुण नायर से मिली सीख
दिलचस्प यह रहा कि जिस खिलाड़ी की वजह से अमन को टीम में जगह नहीं मिल पा रही थी, वही उनके लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना। करुण नायर के साथ हुई बातचीत ने उनके खेल और सोच दोनों को बदल दिया। करुण नायर ने उन्हें समझाया कि हर बल्लेबाज अलग होता है और हर किसी को अपने खेल का रास्ता खुद ढूंढना पड़ता है। यही सीख अमन के करियर का टर्निंग पॉइंट बनी।
करुण नायर पिछला सीजन विदर्भ के लिए खेले थे। उन्होंने पिछले सीजन विदर्भ को विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचाने और रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। करुण नायर ने व्यक्तिगत कारणों से विदर्भ का साथ छोड़ दिया और 2025-26 के घरेलू सीजन के लिए गृह राज्य कर्नाटक लौट गए।
रणजी ट्रॉफी में धमाकेदार वापसी
जब करुण नायर कर्नाटक लौटे और दानिश मलिवार चोटिल हुए, तब अमन को मौका मिला और दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने उसे दोनों हाथों से लपक लिया। रणजी ट्रॉफी में 577 रन, 96 से ज्यादा का औसत और टॉप-5 रन स्कोरर में जगह। अमन ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ मौके का इंतजार कर रहे थे।
विजय हजारे ट्रॉफी के बने नए सितारे
इसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में मौका मिला। अमन मोखाड़े ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में खुद को घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में शामिल कर लिया। नतीजा यह है कि अब वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में शीर्ष पर हैं। अमन मोखाड़े मानते हैं कि टीम के अंदर मुकाबला हमेशा से कड़ा रहा है। आप अपनी जगह को कभी भी हल्के में नहीं ले सकते।
पढ़ाई के साथ क्रिकेट का संघर्ष
अमन मोखाड़े के लिए यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। उनके परिवार में डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर हैं, जहां खेल को करियर के रूप में देखना आम बात नहीं थी। अमन ने माता-पिता से वादा किया था कि क्रिकेट के साथ पढ़ाई भी पूरी करेंगे। यही वजह है कि क्रिकेट में पहचान बनाने के साथ-साथ वह मास्टर्स की पढ़ाई भी कर रहे हैं।
एक सोच जिसने सब बदल दिया
अमन आज भी आंकड़ों के पीछे नहीं भागते। उनका मानना है कि हर गेंद पर फोकस करना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। अमन मोखाड़े जानते हैं कि जब उन्होंने आगे की सोच रखी, तो आउट हो गए, लेकिन जब सिर्फ गेंद पर ध्यान दिया तो इतिहास रचने में सफल हो गए।
अमन मोखाड़े की कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं है। यह उस हर युवा की कहानी है जिसे कभी नजरअंदाज किया गया, जिसे कम मौके मिले, लेकिन उसने खुद पर भरोसा करना नहीं छोड़ा। आज वही अमन मोखाड़े विदर्भ को विजय हजारे ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचाने वाले नायक हैं। वह यह साबित कर चुके हैं कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।
