लाइटहाउस जर्नलिज्म ने पाया कि एक वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है। वीडियो में कई लोग सड़क से नकदी (कैश) लूटते हुए दिखाई दे रहे थे। इसमें सड़क पर पलटा हुआ एक वाहन भी दिखाई दे रहा था।

वीडियो के साथ यह दावा किया गया था कि यह घटना उत्तर प्रदेश के एक हाईवे पर हुई है। जांच के दौरान, हमने पाया कि वीडियो AI-जेनरेटेड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा निर्मित) है और ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

क्या है दावा?

इंस्टाग्राम यूजर ‘अनोखेलाल विश्वकर्मा’ ने अपने प्रोफाइल पर एक झूठे दावे के साथ वीडियो शेयर किया।

अन्य यूजर्स भी इसी वीडियो को मिलते-जुलते दावों के साथ शेयर कर रहे हैं।

जाँच पड़ताल:

हमने वीडियो का बारीकी से निरीक्षण करके जांच शुरू की। यह देखा गया कि वीडियो में लोगों के चेहरे स्पष्ट नहीं थे, और न ही वाहन या उसकी नंबर प्लेट स्पष्ट दिखाई दे रही थीं।

हमने यह देखने के लिए न्यूज रिपोर्ट्स की भी जांच की कि क्या किसी मीडिया प्लेटफॉर्म ने इस घटना को कवर किया है। हमें इस संबंध में कोई भी न्यूज़ रिपोर्ट नहीं मिली।

इसके बाद हमने वीडियो को AI डिटेक्शन टूल्स (AI detection tools) के जरिए चेक करने के लिए डाउनलोड किया।

‘HIVE मॉडरेशन’ ने संकेत दिया कि वीडियो AI-जेनरेटेड है। परिणाम में कहा गया है कि कुल मिलाकर, वीडियो में AI-जेनरेटेड या डीपफेक कॉन्टेंट होने की संभावना है।

हमने वीडियो के स्क्रीनशॉट्स को भी कुछ डिटेक्टर्स के माध्यम से चेक किया, जिन्होंने यह सुझाव दिया कि इन्हें AI का उपयोग करके बनाया गया है।

निष्कर्ष: हाईवे पर लोगों द्वारा नकदी लूटने का वायरल वीडियो AI-जेनरेटेड है। वीडियो और दावा दोनों फर्जी (फेक) हैं।