रूस और यूक्रेन के बीच पिछले तीन सालों से भीषण युद्ध जारी है। तमाम प्रयासों के बाद भी शांति स्थापित नहीं हो पाई है। हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, करोड़ों का आर्थिक नुकसान हुआ है और सैकड़ों लोग विस्थापित हो चुके हैं। अब एक बार फिर अमेरिका इस युद्ध को शांत करने की कोशिश कर रहा है और उसने एक नया प्रस्ताव रखा है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह राष्ट्रपति ट्रंप का ‘फाइनल अल्टीमेटम’ है।
इस प्रस्ताव में कहा गया है कि यूक्रेन को डॉनबास क्षेत्र रूस को देना होगा। डॉनबास के अंतर्गत डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्र आते हैं। क्रीमिया भी रूस का हिस्सा माना जाएगा। यह वही क्षेत्र है जिस पर 2014 में रूस ने कब्जा किया था। फिलहाल यूक्रेन डॉनबास के सिर्फ लगभग 14.5% हिस्से पर ही नियंत्रण रखता है।
अमेरिकी प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यूक्रेन की संप्रभुता का पूरा ध्यान रखा जाएगा और रूस यूक्रेन या नाटो देशों पर हमला नहीं करेगा। यूक्रेन को कई सुरक्षा गारंटी भी दी जाएंगी। यूक्रेनी सेना को अधिकतम छह लाख सैनिकों तक सीमित रखने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव में यह भी जिक्र है कि यूरोपीय फाइटर जेट पोलैंड में तैनात रहेंगे।
इस प्रस्ताव में एक दिलचस्प शर्त यह भी है कि यूक्रेन को जो भी सुरक्षा गारंटी दी जाएगी, उसके बदले अमेरिका ‘कंपनसेशन क्लॉज’ लगाएगा। इसका मतलब यह है कि अगर यूक्रेन कभी रूस पर हमला करता है, तो उसकी दी गई सुरक्षा गारंटी अपने आप खत्म हो जाएगी। इसी तरह अगर यूक्रेन की तरफ से मॉस्को या सेंट पीटर्सबर्ग पर मिसाइल हमला होता है, तो सुरक्षा गारंटी अमान्य मानी जाएगी।
अमेरिका ने यह भी सुझाव दिया है कि यूक्रेन का पुनर्निर्माण करने के लिए एक ‘यूक्रेन डेवलपमेंट फंड’ तैयार किया जाएगा, ताकि युद्ध के बाद उसके विकास में मदद की जा सके।
जानकार मानते हैं कि अमेरिका द्वारा रखा गया यह प्रस्ताव रूस के पक्ष में ज्यादा झुका हुआ दिखाई देता है। ऐसे में यूक्रेन के इस पर सहमत होने की संभावना कम लगती है। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने भी इस पर खुलकर कुछ नहीं कहा है, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा है कि वे युद्ध खत्म करना चाहते हैं। यूक्रेन लगातार कहता रहा है कि वह शांति चाहता है, लेकिन ऐसी शांति जिसमें भविष्य में दोबारा उसके देश पर किसी भी तरह का अतिक्रमण न हो।
ज़ेलेंस्की ने यह भी कहा है कि वर्तमान प्रस्ताव को अगर स्वीकार कर लिया गया, तो यह यूक्रेन के लिए बर्बादी का सबब बन सकता है। यूरोपीय नेता भी इस प्रस्ताव से सहमत नहीं दिख रहे हैं और अभी भी मजबूती से यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह प्रस्ताव व्यावहारिक रूप से सफल होने की संभावना कम है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर यूक्रेन किसी दबाव में इस प्रस्ताव को मान लेता है, तो उसे राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है, क्योंकि यहां मुद्दा यूक्रेन की संप्रभुता और उसके लोगों के सम्मान का है।
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