तुर्की के राष्ट्रपति रेकप तैयप एर्डोगान ने बुधवार (20 जुलाई) को 3 महीने के लिए देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी है। साथ ही उन्होंने पिछले हफ्ते तुर्की में सरकार के तख्तापलट की विफल कोशिशों के पीछे आतंकी समूह का पता लगाने का भी संकल्प लिया है। एर्डोगान ने इसके लिए अमेरिका में रह रहे धार्मिक नेता फतुल्लाह गुलेन के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया है। इसके लिए देशभर में युद्धस्तर पर गिरफ्तारियां हो रही हैं। बता दें कि अब तक तकरीबन 50 हजार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
अंकारा में राष्ट्रपति पैलेस में कहा, “इस तख्तापलट की कोशिश करने वाले आतंकी संगठन के सभी तत्वों को तत्काल रूप से हटाने के लिए आपातकाल घोषित करना जरूरी था।” मालूम हो कि इमरजेंसी घोषित होने के बाद सरकार की शक्तियां काफी बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के मसले पर कोई समझौता नहीं होगा। बता दें कि इमरजेंसी की घोषणा राष्ट्रपति पैलेस में एर्डोगान की अध्यक्षता में तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और कैबिनेट की लंबी बैठकों के बाद की गई। एक अधिकारी ने बताया कि इससे सरकार को आवागमन की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए अतिरिक्त शक्तियां मिल जाती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का अनुपालन करते हुए इससे वित्तीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर पाबंदी नहीं लगाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 1987 में देश के दक्षिण-पूर्व प्रांतों में कुर्द लड़ाकों से लड़ने के लिए उन जगहों पर इमरजेंसी घोषित की गई थी। 2002 में उसको अंतिम रूप से हटाया गया था। देश में संविधान के अनुच्छेद 120 में इमरजेंसी लागू करने संबंधी प्रावधान हैं।
