सउदी अरब में एक दिन में तीन आत्मघाती बम हमले हुए हैं, जिनमें से एक हमले में इस्लाम के दूसरे सबसे पाक स्थल यानी मदीना में पैगंबर साहब की मस्जिद को भी निशाना बनाया गया। इस हमले में चार सुरक्षाकर्मी मारे गए। इस्लाम के इस आध्यात्मिक केंद्र पर सोमवार (4 जुलाई) को ऐसे समय पर हमला बोला गया, जब मुस्लिम इस सप्ताह रमजान के समापन और ईद के जश्न की तैयारी कर रहे थे। हमलों की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है लेकिन इस्लामिक स्टेट समूह ने अपने समर्थकों से इस पाक महीने में हमले करने की अपील की है। रमजान के दौरान गोलीबारी और बमबारी की एक के बाद एक हुई घटनाओं में कभी उसने जिम्मेदारी ली है तो कभी उसे जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। इन घटनाओं में ओरलैंडो, बांग्लादेश, इस्तांबुल और बगदाद में हुए आतंकी हमले शामिल हैं।

मदीना में आत्मघाती बम हमला पैगंबर साहब की मस्जिद में शाम की नमाज के दौरान हुआ। मदीना में ही पैगंबर मोहम्मद साहब की मजार है और यहां हर साल लाखों लोग आते हैं। सउदी के गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सुरक्षाबलों को उस व्यक्ति पर संदेह है जो पार्किंग क्षेत्र से होता हुआ पैगंबर की मस्जिद की ओर जा रहा था। बयान में कहा गया, ‘जब सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की, उसने खुद को एक विस्फोटक पट्टी से उड़ा लिया। इसके कारण उसकी और चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई।’

मदीना को निशाना बनाए जाने के कारण व्यापक स्तर पर गुस्सा फैल गया। काहिरा में सुन्नी इस्लाम की शीर्ष संस्था अल अजहर ने हमलों की निंदा करते हुए ‘खुदा, खासकर पैगंबर मोहम्मद साहब के घरों की पवित्रता’ पर जोर दिया। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता जनरल मंसूर अल तुर्की ने खबरों के सरकारी चैनल अल-अखबारिया को बताया कि हमलावर दूतावास की तुलना में इलाके की मस्जिद के ज्यादा करीब था।

मंत्रालय ने कहा अधिकारिक समाचार एजेंसी एसपीए पर जारी बयान में कहा कि बम हमलावर की विस्फोटक पट्टी में ‘आंशिक’ तौर पर विस्फोट हुआ। राज्य की प्रमुख परामर्श संस्था यानी सउच्च्दी अरब की शूरा काउंसिल के प्रमुख ने कहा कि यह हमला ‘अभूतपूर्व’ था। अब्दुल्ला अल-शेख ने कहा, ‘रोंगटे खड़े कर देने वाले इस अपराध की साजिश ऐसा कोई व्यक्ति रच ही नहीं सकता, जिसके दिल में विश्वास का एक कण भी होगा।’

प्रमुख शिया शक्ति माने जाने वाले ईरान ने भी इन बम हमलों की निंदा की है और मुस्लिमों को चरमपंथ के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने ट्विटर पर कहा, ‘आतंकियों ने सारी सीमाएं लांघ दी हैं। अगर हम एकजुट होकर नहीं खड़े होते हैं, तो सुन्नी और शिया दोनों ही पीड़ित बनते रहेंगे।’
रियाद में अमेरिकी दूतावास ने दूतावास कर्मचारियों में से किसी के हताहत होने की कोई जानकारी नहीं दी है। यह हमला अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस यानी चार जुलाई की छुट्टी के दौरान हुआ।