अमेरिकी जांच एजेंसी सीआईए के एक पूर्व अधिकारी जॉन निक्सन द्वारा लिखी गई किताब “डीब्रीफिंग द प्रसिडेंट: द इन्टेरोगेशन ऑफ सद्दाम हुसैन” में अपनी चौकाने वाली राय दी है। टाइम मैगजी ने इस किताब के कुछ हिस्सों को अपनी न्यूज वेबसाइट पर साझा किया है। इसके मुताबिक निक्सन ने अपनी किताब में राय दी है कि सद्दाम हुसैन को इराक पर राज करने देना चाहिए था। दिसंबर 2003 में अमेरिका द्वारा इराक पर हमले के बाद वहां के तानाशाह सद्दाम हुसैन को हिरासत में लिया गया था। निक्सन उस दल का हिस्सा थे जिसने सद्दाम का इंन्टेरोगेशन किया था। साथ ही निक्सन ने अपनी किताब में सद्दाम हुसैन के इंन्टेरोगेशन के कुछ अनुभाव भी साझा किए हैं। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि सद्दाम हुसैन ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि इराक पर कब्जा करना उसके लिए आसान नहीं होगा।
निक्सन लिखते हैं, “हिरासत के दौरान जब मैंने सद्दाम से पूछताछ की, तो उसने मुझसे कहा, “तुम नाकामयाब रहोगे। तुम्हें मालूम चलेगा कि इराक पर शासन करना आसान काम नहीं है।” निक्सन आगे लिखते हैं कि जब उन्होंने सद्दाम से पूछा कि उन्हें ऐसा क्यों लगता है, तो सद्दाम ने जवाब दिया, “तुम इराक में इसलिए नाकामयबा रहोगे क्योंकि तुम इसकी जुबान और इसकी भाषा नहीं जानते। तुम्हें इसका इतिहास भी नहीं पता। तुम्हें अरब का दिमाग भी नहीं पढ़ना आता।” साथ ही निक्सन ने सद्दाम के बारे में बताते हुए लिखा कि सद्दाम ने एकबार उनसे कहा था, कि इराक में उनकी सत्ता से पहले इराक वहां बस कलह और बहसबाजी होती थी और उन्होंने ये सब खत्म करके लोगों को अपनी बातों से सहमत कराया था।
अपनी राय देते हुए निक्सन ने लिखा है कि उन्हें उस समय सद्दाम की बात पर यकीन नहीं हुआ था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सद्दाम सही कह रहे थे। उनका यह भी मानना है कि “इराक जैसे कई समुदायों में बटें देश को सही तरह से चलाने के लिए सद्दाम जैसे क्रूर शासक की जरूरत थी। निक्सन ने लिखा है, ‘सद्दाम के नेतृत्व का तरीका और क्रूरता उनके शासन के सबसे बड़े दोषों में से थे, लेकिन जब उन्हें लगता कि उनकी सत्ता को खतरा है, तो वह बेहद शातिर भी हो सकते थे। निश्चय तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि सद्दाम के शासन को जनता आंदोलन से उखाड़ फेंकती।”
वहीं आईएसआई पर भी निक्सन ने लिखा है कि “सद्दाम के शासन में आईएसआई जैसे किसी आतंकवादी संगठन का उभरना और सफल हो पाना बिल्कुल असंभव था।” इसके अलावा उन्होंने अपनी किताब में यह भी लिखा है कि वह सद्दाम को बिल्कुल नापसंद करते हैं, लेकिन उनके मन में उनके लिए काफी सम्मान है।

