उत्तर कोरिया का अपने परमाणु कार्यक्रम पर छह पक्षीय वार्ता की बहाली का कोई ‘इरादा’ नहीं है। यह बात प्योंगयांग के एक शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार (23 जून) को बीजिंग में कही। उत्तर कोरिया स्थगित हो चुकी वार्ता से हट गया है जिसका उद्देश्य 2009 के इसके परमाणु हथियार कार्यक्रम और इसके तुरंत बाद इसके द्वारा किए गए दूसरे परमाणु परीक्षण के कार्यक्रम को खत्म करना है। वार्ता का आयोजन चीन करता है जिसमें दक्षिण कोरिया, अमेरिका, रूस और जापान शामिल हैं। उत्तर कोरिया के मुख्य राजनयिक संरक्षक और उसे आर्थिक लाभ पहुंचाने वाला बीजिंग वार्ता को बहाल करना चाहता है जबकि वॉशिंगटन, सोल और टोक्यो ने प्योंगयांग पर दबाव बनाया कि उसे परमाणु कार्यक्रम खत्म करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाना चाहिए।
प्योंगयांग विदेश मंत्रालय में उत्तर अमेरिका मामला ब्यूरो की उप महानिदेशक चोई सोन हुई ने बीजिंग में कहा, ‘फिलहाल वार्ता में भाग लेने का हमारा विचार नहीं है जिसमें डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) के परमाणु निरस्त्रीकरण पर चर्चा होने वाली थी।’ वह चीन की राजधानी में वार्षिक सुरक्षा कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई थीं जिसमें छह पक्षों में हर देश का प्रतिनिधि शामिल होता है।
देश के दूतावास के बाहर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘इन परिस्थितियों में जहां अमेरिका की प्रतिकूल नीति अब भी जारी है, डीपीआरके इस स्थिति में नहीं है कि कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु निरस्त्रीकरण के बारे में चर्चा की जाए।’ हाल के वर्षों में चीन और उत्तर कोरिया के बीच संबंधों में तनाव आया है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा के बावजूद प्योंगयांग ने अपने परमाणु परीक्षण को जारी रखा और किम जांग यून ने सत्ता में आने के तीन वर्षों बाद बीजिंग का दौरा किया। हाल के महीने में कई बार विफल होने के बावजूद उत्तर कोरिया ने मध्यम रेंज के दो शक्तिशाली मुसुदन मिसाइलों का बुधवार (22 जून) को परीक्षण किया जिनमें से एक का जापान सागर में 400 किलोमीटर का रेंज रहा।
