तुर्की ने इस्तांबुल हवाई अड्डा हमला मामले में गुरुवार 30 जून इस्लामिक स्टेट के 13 संदिग्ध जिहादियों को हिरासत में लिया। आत्मघाती हमलावरों ने कैसे इस हवाई अड्डे पर हमला किया था, इस बारे में चौंकाने वाले ब्योरा सामने आया है। सरकारी संवाद समिति एनादोलु के अनुसार अतार्तुक हवाई अड्डे पर मंगलवार (28 जून) को हुई गोलीबारी और आत्मघाती बम हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गयी है। इनमें 13 विदेशी थे। इस हमले में 200 से अधिक लोग घायल भी हुए।
तुर्की अतार्तुक हवाई अड्डे के इस नरसंहार के बाद शोक और सदमे की हालत में है। एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने आज तड़के इस्तांबुल में 16 विभिन्न स्थानों पर एक साथ छापा छापा और ये 13 आईएस संदिग्ध पकड़े गए। इनमें तीन विदेशी नागरिक हैं। उन्होंने अपनी पहचान नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘ऐसी संभावना है कि कम से कम एक हमलावर विदेशी नागरिक था।’ तुर्की में पिछले साल भर में कई घातक हमले हुए हैं जिनके लिए आईएस या कुर्दिश विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। हवाई अड्डे पर यह हमला अहम ग्रीष्म पर्यटक सीजन शुरू होने से ठीक पहले हुआ है।
तुर्की के गृहमंत्री एफकान आला ने बुधवार (29 जून) संवाददाताओं को बताया था कि इस हमले के पीछे कौन है, उसका पता लगाने के लिए गंभीर एवं समग्र जांच चल रही है। आईएस के लिए दूसरा नाम इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कहा, ‘पहला इशारा डेस की ओर है लेकिन अबतक यह पक्का नहीं है।’ सीआईए निदेशक जॉन ब्रेनन ने बताया कि इस हमले से जिहादी संगठन का संकेत मिलता है। इस बात का विवरण सामने आ रहा है कि हमलावर स्वचालित राइफलों से यात्रियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाने और आत्मघाती बम धमाके करने से पहले कैसे तुर्की के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर टैक्सी से पहुंचे।
प्रधानमंत्री ने बुधवार (29 जून) को कहा था, ‘आतंकवादी नियमित सुरक्षा तंत्र, स्कैनर और पुलिस नियंत्रण से निकलने में विफल रहे। तब वे लोटे और उन्होंने अपने सूटकेस से लंबी रेंज की राइफलें निकाली और लोगों पर अचानक गोलियां चलाकर सुरक्षा नियंत्रण भेद दिया।’ उन्होंने कहा, ‘उनमें से एक ने बाहर विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया। दो अन्य गोलियां चलने के दौरान दहशत का फायदा उठाकर अंदर घुस गए और उन्होंने विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया।’
