भारत और पाकिस्तान के बीच के कश्मीर मुद्दे के समाधान के मामले में डोनाल्ड ट्रंप शामिल नहीं होंगे क्योंकि नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के साथ संबंधों को गहरा बनाने का संकेत दिया है। एक शीर्ष अमेरिकी विशेषज्ञ ने (शुक्रवार, 2 दिसंबर) को यह बात कही। ‘द डेली सिग्नल’ में प्रकाशित एक ऑप-एड में द हेरिटेज फाउंडेशन की लीसा कुर्टिस ने लिखा है, ‘इस बात को लेकर बहुत अधिक शंका है कि ट्रंप प्रशासन भारत-पाकिस्तान विवाद में खुद को शामिल करने पर विचार करेगा, खासकर ऐसे समय में जब ट्रंप ने इस बात के संकेत दिये हैं कि उनकी दिलचस्पी भारत के साथ संबंधों को गहरा बनाने को लेकर है।’ कुर्टिस ने बताया, ‘वास्तव में अमेरिका दोनों परमाणु संपन्न प्रतिद्वंद्वियों के बीच के तनाव को कम करने का प्रयास करके ज्यादा उपयोगी भूमिका निभा सकता है। इसे पाकिस्तान पर भारत विरोधी आतंकियों को खत्म करने के लिए दबाव डालना चाहिए, जो उसके (पाकिस्तान के) क्षेत्र में स्वतंत्रता के साथ अभियान चलाते हैं।’ अपने आलेख में कुर्टिस ने कहा कि अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ फोन पर हुई बातचीत को लेकर चिंता जतायी जा रही है और इसका अर्थ उपमहाद्वीप को लेकर उनकी नीतियों से लगाया जा सकता है।