अाइसलैंड का सबसे बड़ा ज्वालामुखी एक बार फिर लावा उगलने को तैयार है। 1977 के बाद सोमवार को सबसे बड़े झटकों का शिकार हुए क्रेटर ऑफ कटला ने आस-पास के इलाकों में दहशत पैदा कर दी है। देश के मेट्रोलॉजिकल ऑफिस ने एक बयान में कहा कि चार से ज्यादा की तीव्रता वाले दो भूकंपों ने क्रेटर ऑफ कटला को हिलाकर रख दिया। इससे पहले, ज्वालामुखी क्षेत्र में कम से कम 10 और भूकंप आए,जो उत्तरी अटलांटिक द्वीप के दक्षिणी तट की हवा में 1,450 मीटर्स तक उठा। द इंडिपेंडेंट के अनुसार, अभी तक जान-माल के किसी नुकसान की कोई खबर नहीं है। कटला ने आखिरी बार 1955 और 1999 में लावा उगला था। दोनों बार ही कटला के चारों तरफ जमी चौड़ी बर्फ नहीं पिघल पाई थी। ज्वालामुखी में पिछला बड़ा विस्फोट 1918 में हुआ था, जब कटला ने पांच सप्ताह से ज्यादा समय तक राख उगली थी। कटला का व्यास 10 किलोमीटर है और यह 200-700 मीटर बर्फ से घिरा हुआ है। यह ज्वालामुखी आमतौर पर 40-80 साल में लावा उगलता है।
आइसलैंड के ऍयाफ़्यात्लायोएकुत्ल्ल ज्वालामुखी ने छह साल पहले लावा उगला था। इसके 2010 में लावा उगलने की वजह से यूरोप के ऊपर से उड़ने वाली एक लाख से ज्यादा फ्लाइट्स को निरस्त करना पड़ा था। पूरी दुनिया को यह डर था कि लावा से बने शीशे जैसे कण एयरक्राफ्ट इंजन में पिघल सकते हैं और टरबाइंस को जाम कर सकते हैं। इतिहास की नजर से देखें तो कटला के लावा उगलने से एक-दो साल पहले ऍयाफ़्यात्लायोएकुत्ल्ल फट पड़ता है। पिछले सप्ताह मध्य इटली में आए 6.2 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 250 लोगों ने अपनी जान गवां दी थी।
