चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को कहा कि चीन अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं देगा और देश अपने दुश्मनों के साथ खूनी संघर्ष के लिए तैयार है। शी ने चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के वार्षिक सत्र में कहा, “हम हमारी जमीन का एक इंच टुकड़ा भी किसी का नहीं देंगे और इसे चीन से कोई ले भी नहीं सकता।” शी ने ग्रेट हॉल में कहा, “हम अपने दुश्मनों के खिलाफ खूनी लड़ाई लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” चीन को ताइवान और हांगकांग के देश से पृथक हो जाने का डर है।
ताइवान स्वशासित द्वीप है, जिस पर बीजिंग अपना दावा करता है और भविष्य में इसके चीन के साथ मिलने की आशा करता है। पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी और अब चीन के एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र हांगकांग में लोग बीजिंग के बढ़ते हस्तक्षेप से खफा हैं। प्रधानमंत्री ली केकियांग ने भी शी के विचार को दोहराया। ली ने एनपीसी सत्र के अंतिम दिन एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “चीन अपनी क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए ढृढ़ है और अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं छोड़ेगा। देश न ही किसी अन्य देश का इंच टुकड़ा लेगा और न ही किसी को देगा।”
बता दें कि चीन की संसद ने शनिवार को शी जिनपिंग को एक बार फिर देश का राष्ट्रपति चुना जबकि उनके करीबी सहयोगी वांग किशान उपराष्ट्रपति चुने गए। शी (64) का दोबारा निर्वाचित होना एक तरह से औपचारिकता मात्र थी क्योंकि चीन के शीर्ष निकाय ने 11 मार्च को संविधान के उस नियम को खत्म कर दिया, जिसके अंतगर्त राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए दो बार का कार्यकाल ही निश्चित था। शी साल 2013 में चीन के राष्ट्रपति बने थे। उन्हें केंद्रीय सैन्य आयोग का अध्यक्ष भी दोबारा निर्वाचित किया गया।
शी की तरह ही वांग की नियुक्ति भी हैरान कर देने वाली नहीं रही। जहां शी के पक्ष में सभी 2,970 वोट पड़े, वहीं वांग के निर्वाचन के खिलाफ मात्र एक वोट पड़ा था। वांग (69) शी के सबसे विश्वसनीय सहयोगी हैं और वह भ्रष्टाचार-रोधी अभियान की अगुवाई कर चुके हैं।
